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केतन अग्रवाल मर्डर केस: बाली रवाना होने से पहले कार में हुई थी ये अहम घटना, ड्राइवर का बड़ा खुलासा..

केतन अग्रवाल मर्डर केस: बाली रवाना होने से पहले कार में हुई थी ये अहम घटना, ड्राइवर का बड़ा खुलासा..

 केतन अग्रवाल हत्याकांड में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अब सिया और केतन को पुणे से मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने वाले ड्राइवर ने पहली बार कैमरे पर अपनी बात रखी. उसने बताया कि बाली रवाना होने के दौरान कार में क्या-क्या हुआ था. जानिए पूरी बात.

सिया केतन केस

पुणे निवासी केतन अग्रवाल हत्याकांड केस में कैब ड्राइवर में बड़ा खुलासा किया है. जब सिया और केतन प्री वेडिंग शूट के लिए बाली जा रहे थे, तो उस दौरान एयरपोर्ट छोड़ने के लिए जो कैब ड्राइवर गया था, उसने पूरा सच बताया है. उसने बताया कि बाली रवाना होने के दौरान कार में क्या हुआ था और पूरे सफर के बारे में जानकारी साझा की. ड्राइवर वैभव जाधव के मुताबिक, केतन अग्रवाल और सिया प्री-वेडिंग शूट के लिए बाली जा रहे थे. इसके लिए उन्होंने पुणे से मुंबई एयरपोर्ट तक जाने के लिए कार बुक की थी.

रिपोर्टर: दादा, क्या बताएंगे? आप केतन और सिया को पुणे से मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे. उस दौरान क्या हुआ? आपने उन्हें कहां से पिकअप किया था? एयरपोर्ट तक पहुंचने से पहले क्या-क्या हुआ?

ड्राइवर (वैभव): मैडम, मैंने उन्हें बिबवेवाड़ी से पिकअप किया था. मुझे नीलकंठ ट्रैवल्स से बुकिंग मिली थी. जब मैं वहां पहुंचा, तो सिया गाड़ी में नहीं बैठ रही थी. उसके भाई ने उसे पकड़कर जबरदस्ती गाड़ी में बैठाया. उसके बैठते ही मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी. सिया के माता-पिता ने मुझसे कहा कि आराम से जाना, इसलिए मैं आराम से गाड़ी चला रहा था.

जब हम औंध पहुंचे, तो उन्होंने गाड़ी रुकवाई. वहां भाई ने कहा, “भैया, गाने लगा दो.” मैंने गाने लगा दिए. वह, जो पहले पीछे बैठा था, आगे आकर बैठ गया. इसके बाद हम लोनावला पहुंचे.

लोनावला पहुंचने पर उन्होंने कहा, “आप नीचे रुको, हम ऊपर से 10-15 मिनट में आते हैं.” वे करीब 15 मिनट के लिए ऊपर गए. फिर छह लोग नीचे आए, जिनमें से चार लोग गाड़ी में बैठ गए. उनके बैठने के बाद मैं वहां से निकल गया.

इसके बाद हम फूड मॉल पहुंचे. वहां मैं करीब 10 मिनट तक गाड़ी में ही बैठा रहा और बाकी सभी चाय पीने चले गए. तभी एक लड़की मेरे पास आई और बोली, “भैया, गाड़ी लॉक कर दो.” मैंने गाड़ी लॉक कर दी. इसके बाद उसने अपने पर्स से कुछ सामान निकाला. मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह कुछ अपनी जेब में रख रही थी. फिर मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. करीब आधे घंटे बाद सभी वापस आए और गाड़ी में बैठकर मुंबई एयरपोर्ट के लिए निकल गए.

मुंबई एयरपोर्ट पहुंचकर मैंने उन्हें ड्रॉप कर दिया। वहां से करीब 200 मीटर आगे बढ़ा ही था कि उनका फोन आया. उन्होंने कहा, “भैया, मेरा बैग गाड़ी में रह गया है.” मैंने कहा, “मैं 200 मीटर पीछे रिवर्स लेकर आता हूं.” मैं वापस गया और उन्हें उनका बैग दे दिया.

इसके बाद मैं करीब 500 मीटर आगे बढ़ा तो फिर उनका फोन आया. इस बार उन्होंने कहा, “भैया, मेरा पासपोर्ट गाड़ी में रह गया है, चेक करो.” उन्होंने मुझे वीडियो कॉल किया. मैंने पूरी गाड़ी दिखा दी. फिर उन्होंने कहा, “एयरपोर्ट पर आकर अंदर दिखाओ.” मैं पार्किंग में गया। वहां दो लड़के आए. उन्होंने मोबाइल की बैटरी आदि लगाकर पासपोर्ट और सामान चेक किया, लेकिन गाड़ी में कुछ नहीं मिला. इसके बाद मैं वहां से निकल गया और मेरे मालिक ने मुझे दूसरा भाड़ा दे दिया.

रिपोर्टर: जब आप उन्हें मुंबई एयरपोर्ट लेकर जा रहे थे, तब गाड़ी का माहौल कैसा था? क्या कोई विवाद हुआ था?

ड्राइवर (वैभव): नहीं, बिबवेवाड़ी से लोनावला तक भाई-बहन के बीच थोड़ा विवाद चल रहा था. उसके बाद सब सामान्य हो गया. वे गाने सुनते हुए, हंसते-खेलते मुंबई तक गए.

रिपोर्टर: जब आप फूड मॉल पर रुके थे, क्या उस समय आपको लगा कि बैग से कुछ निकाला गया है?

ड्राइवर (वैभव): नहीं मैडम, हम ग्राहकों की निजी बातों पर ध्यान नहीं देते.

रिपोर्टर: लेकिन आपने देखा था कि सिया अपने बैग से कुछ निकाल रही थी?

ड्राइवर (वैभव): हां, मैंने देखा था कि वह पर्स से कुछ निकाल रही थी. जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो उसने मेरी तरफ देखा. उसके बाद मैंने ध्यान नहीं दिया. उसने वह चीज अपनी जेब में रखी और अंदर चली गई. फिर 15-20 मिनट या करीब आधे घंटे बाद वे वापस आए और हम एयरपोर्ट के लिए निकल गए.

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