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घर में दीपक जलाना सिर्फ ईश्वर की आराधना नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और दैवीय आशीर्वाद का स्रोत है..?

घर में नियमित रूप से दीया जलाना सिर्फ ईश्वर की आराधना का एक तरीका नहीं है बल्कि ये सदियों से चली आ रही परंपरा का भी हिस्सा है। कोई भी त्योहार हो या शुभ अवसर दीपक जलाने से घर और आस-पास के वातावरण में सकरात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह एक ऐसा पवित्र काम है जो दैवीय आशीर्वाद की तरफ आपको आकर्षित करता है और किसी भी बुरी ऊर्जा को दूर करता है। जिस तरह से नियमित दीपक जलाना शुभ है, वैसे ही दीपक को सही समय पर और सही दिशा में रखना भी बहुत जरूरी है जिससे किसी तरह का वास्तु दोष न लगे। आइए आपको बताते हैं घर में दीपक जलाने के कुछ विशेष नियमों के बारे में।

घर में दीया जलाने की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण किसी भी घर की सबसे पवित्र दिशा में से एक होती है। यह दैवीय ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा की दिशा मानी जाती है, जो जल तत्व और भगवान शिव से जुड़ी होती है।

यदि आपके घर का मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा में हो तो यह सबसे शुभ होता है और आपको इसी दिशा में रोज सुबह शाम दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए।

आपका पूजा का स्थान किसी और दिशा में भी है तब भी आपको दीपक हमेशा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। अगर आप इस दिशा में घी का दीपक जलाते हैं तो यह सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इस दिशा में दिया जलाने से ईश्वरीय आशीर्वाद मिलता है।

दीये की लौ की दिशा किस तरफ होनी चाहिए?

सुबह की पूजा के दौरान आपके दीये की लौ पूर्व दिशा की ओर होनी चाहिए क्योंकि इसे सूर्योदय की दिशा माना जाता है। वहीं शाम की पूजा के समय ध्यान रखें कि दीपक की लौ उत्तर दिशा की तरफ होनी चाहिए, क्योंकि इसे कुबेर की दिशा कहा जाता है और यह धन की दिशा भी मानी जाती है। इस दिशा में दीपक जलाना आपके लिए धन को आकर्षित करने में मदद करता है।

किस दिशा में नहीं जलाना चाहिए पूजा जा दीपक?

जब भी आप किसी भी पूजा-पाठ के लिए दीपक रख रहे हैं तो ध्यान रखें कि दीये को कभी भी दक्षिण दिशा में न रखें। इस दिशा का संबंध यम से होता है और इस दिशा में पूजा का दीपक न जलाकर पितरों के नाम का दीपक जलाया जाता है। इसके साथ ही, आप पूजा का दीपक हमेशा सीधे जमीन पर न रखकर इसी किसी चौकी या स्टैंड में ही रकहेन।

किस समय दीपक जलाना शुभ माना जाता है?

आपकी नियमित पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त में पूजा का दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। यह समय सुबह 4 से 6 बजे के बीच का माना जाता है। इसके साथ ही, आप संधा की पूजा का दीपक गोधूलि बेला में जलाएं तो अत्यंत शुभ होगा।

आपको रात के समय कुछ शुभ अवसरों जैसे नवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा या दीपावली में जलाना चाहिए। यदि आप नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाती हैं तो यह नौ दिनों तक दिन के 24 घंटे तक जलती रहनी चाहिए।

अगर आप भी अपनी नियमित पूजा के लिए घर में दीपक जलाते हैं, तो यहां बताए नियमों का पालन करना जरूरी है। जिससे आपको इस शुभ काम का पूर्ण फल मिल सके और जीवन में खुशहाली बनी रहे।

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