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इंडिगो विमान पर ‘गिरी’ बिजली, फिर भी सुरक्षित रहे 104 यात्री, जानिए प्लेन को कैसे बचाता है सुरक्षा का विज्ञान’

इंडिगो विमान पर ‘गिरी’ बिजली, फिर भी सुरक्षित रहे 104 यात्री, जानिए प्लेन को कैसे बचाता है सुरक्षा का विज्ञान’

पटना: पटना से लखनऊ जा रही इंडिगो की फ्लाइट उस समय आकाशीय बिजली की चपेट में आ गई, जब विमान करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। विमान में 104 यात्री सवार थे। बिजली गिरने के बावजूद किसी यात्री को नुकसान नहीं हुआ और पायलट ने विमान को सुरक्षित लखनऊ एयरपोर्ट पर उतार लिया।

इस घटना के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आसमान में उड़ रहे विमान पर बिजली गिरने के बावजूद अंदर बैठे यात्रियों को करंट क्यों नहीं लगता? दरअसल, आधुनिक विमानों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि आकाशीय बिजली का प्रभाव मुख्य रूप से विमान की बाहरी सतह तक सीमित रहे।

विमान पर बिजली गिरने पर क्या होता है?

बिजली गिरने पर विमान के बाहरी हिस्से से विद्युत धारा गुजरती है और वह विमान की सतह के जरिए एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक अपना रास्ता बनाती है। विमान की संरचना में इस्तेमाल होने वाली चालक धातु और विशेष इलेक्ट्रिकल प्रोटेक्शन सिस्टम बिजली को यात्रियों और विमान के संवेदनशील हिस्सों से दूर रखने में मदद करते हैं।

आधुनिक विमानों में एल्यूमिनियम जैसी चालक धातुओं के अलावा कुछ जगहों पर कंपोजिट सामग्री के साथ विशेष कंडक्टिव लेयर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्युत धारा को विमान की बाहरी सतह के आसपास नियंत्रित तरीके से प्रवाहित करना होता है।

फैराडे केज सिद्धांत कैसे करता है काम?

विमान की सुरक्षा को समझने के लिए फैराडे केज सिद्धांत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत के अनुसार किसी चालक पदार्थ की बंद या लगभग बंद संरचना पर बाहरी विद्युत क्षेत्र पड़ने पर विद्युत आवेश उसकी बाहरी सतह पर व्यवस्थित हो जाता है। इससे अंदर का हिस्सा बाहरी विद्युत क्षेत्र के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रहता है।

यही कारण है कि विमान के बाहरी हिस्से से गुजरने वाली बिजली सीधे यात्री के शरीर तक नहीं पहुंचती। हालांकि विमान में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा व्यवस्था केवल फैराडे केज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें विद्युत सुरक्षा, वायरिंग प्रोटेक्शन और अन्य डिजाइन उपाय भी शामिल होते हैं।

क्या विमान को बिल्कुल नुकसान नहीं होता?

ऐसा नहीं है कि बिजली गिरने का विमान पर कोई असर ही नहीं होता। आकाशीय बिजली के संपर्क में आने पर विमान की बाहरी सतह पर छोटे जलने के निशान, खरोंच या अन्य मामूली क्षति हो सकती है। विमान के कुछ बाहरी हिस्सों की जांच भी करनी पड़ सकती है।

विमान के महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और ईंधन सिस्टम को भी इस तरह डिजाइन किया जाता है कि बिजली गिरने की स्थिति में जोखिम को कम किया जा सके। यही वजह है कि ऐसी घटनाओं के बाद विमान की तकनीकी जांच की जाती है।

यात्रियों को क्यों नहीं लगता करंट?

बिजली का रास्ता मुख्य रूप से विमान की बाहरी चालक संरचना के साथ रहता है। यात्री केबिन को इस विद्युत प्रवाह से अलग रखने के लिए विमान के डिजाइन में कई सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। इसलिए बाहर से देखने पर बिजली गिरने की घटना बेहद खतरनाक लग सकती है, लेकिन विमान के अंदर बैठे यात्रियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत होती है।

यानी आसमान में विमान पर बिजली गिरना असामान्य घटना जरूर है, लेकिन आधुनिक यात्री विमानों को ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही डिजाइन और प्रमाणित किया जाता है। यही वजह है कि बिजली की चपेट में आने के बाद भी विमान सुरक्षित रूप से अपनी उड़ान जारी रख सकता है या जरूरत पड़ने पर नजदीकी एयरपोर्ट पर उतर सकता है।

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