लखनऊ : अलीगंज में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने संबंधित अवैध कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार सुबह एलडीए की पांच सदस्यीय जांच समिति मौके पर पहुंची और भवन का निरीक्षण किया। साथ ही अग्निकांड से संबंधित तस्वीरों के साथ एक नया नोटिस भी भवन पर चस्पा किया गया। नोटिस के अनुसार, 7 जुलाई को भवन का ध्वस्तीकरण किया जाएगा।

जांच के दौरान अलीगंज के सेक्टरडी स्थित वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल और सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल की एक अन्य संपत्ति भी चिन्हित की गई है। इस आवासीय भवन के बेसमेंट से लेकर तीसरी मंजिल तक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। बताया जा रहा है कि छह माह पहले इस भवन में भी आग लग चुकी है। एलडीए की टीम इसके दस्तावेजों की जांच कर रही है।
अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति ने मंगलवार को सेक्टरडी स्थित भवन संख्या एमएस/102 के अभिलेखों की जांच की थी। इसके बाद नया नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कहा गया है कि 185 वर्गमीटर के आवासीय भूखंड पर स्वीकृत मानचित्र की शर्तों का उल्लंघन करते हुए सेटबैक क्षेत्र को कवर कर बेसमेंट, भूतल, प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल का निर्माण किया गया तथा पिछले 10 वर्षों से इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
एलडीए के अनुसार, निर्माण से संबंधित मानचित्र और अन्य अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। विहित प्राधिकारी अजीत कुमार की ओर से जारी नोटिस में बिना अनुमति किए गए निर्माण पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाने का भी उल्लेख किया गया है।
एलडीए अधिकारियों ने बताया कि 23 जून को जारी नोटिस की अवधि 7 जुलाई की सुबह समाप्त होगी। इसके बाद उसी दिन भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
एसआईटी के सवालों में घिरी एलडीए टीम
घटनास्थल की जांच के बाद एलडीए की आंतरिक टीम शासन द्वारा गठित एसआईटी के समक्ष पेश हुई। एसआईटी ने वर्ष 2016 में जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को बाद में निरस्त किए जाने के कारणों पर सवाल उठाए।
जवाब में टीम ने बताया कि उस समय भवन के व्यावसायिक उपयोग का स्पष्ट खाका उपलब्ध नहीं था। इसी आधार पर संबंधित पक्ष से शपथपत्र लेकर विहित प्राधिकारी ने ध्वस्तीकरण आदेश वापस ले लिया था।
एसआईटी ने यह भी पूछा कि जब भवन के लिए केवल बेसमेंट और दो मंजिल तक का आवासीय मानचित्र स्वीकृत था, तब दो अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कैसे हो गया। इस सवाल पर एलडीए अधिकारियों के पास संतोषजनक जवाब नहीं था। टीम ने बताया कि उस समय अधिशासी अभियंता के पास ही जोनल अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी था।
प्रारंभिक जांच में पांच इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की गई है। एलडीए ने सहायक अभियंताओं और अवर अभियंताओं के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई की संस्तुति की है।
एक और अवैध कॉम्प्लेक्स की जांच
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल और सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल के नाम पर सेक्टरडी स्थित एल3/79 पते पर एक अन्य अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स भी संचालित है। इस भवन में छह माह पहले आग लग चुकी है। वर्तमान में इसके बेसमेंट में ब्यूटी पार्लर संचालित हो रहा है तथा जनरेटर सड़क पर रखा गया है।
एलडीए इस भवन से जुड़े अभिलेखों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार तक इस परिसर पर भी नोटिस चस्पा कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।



