
आजकल ज्यादातर घरों में सफेद और बारीक पिसे आटे का इस्तेमाल किया जाता है। रोटियां मुलायम और देखने में अच्छी बनें, इसके लिए कई बार आटे को इतना बारीक पिसवाया जाता है कि उसमें मौजूद चोकर भी अलग कर दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गेहूं की इसी बाहरी परत में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हैं?
चोकरयुक्त आटा खाने से शरीर को फाइबर मिलता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने और संतुलित खानपान बनाए रखने में भी सहायक हो सकता है। यही वजह है कि पोषण विशेषज्ञ साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर भोजन को रोजाना की डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं।
क्या होता है गेहूं का चोकर?
गेहूं के दाने के मुख्य रूप से तीन हिस्से होते हैं। बाहरी परत को चोकर, बीच के हिस्से को एंडोस्पर्म और अंदर के छोटे हिस्से को जर्म कहा जाता है।
चोकर में मुख्य रूप से आहार फाइबर के साथ कुछ विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। जब गेहूं को ज्यादा रिफाइन करके उसका बाहरी हिस्सा निकाल दिया जाता है, तो आटे में मौजूद फाइबर और कुछ पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है।
इसलिए साबुत गेहूं से तैयार आटा, जिसमें चोकर मौजूद रहता है, सामान्यतः अधिक फाइबर वाला विकल्प होता है।
चोकरयुक्त आटा खाने के 5 बड़े फायदे
1. कब्ज की परेशानी में मिल सकती है राहत
चोकर में मौजूद अघुलनशील फाइबर मल की मात्रा बढ़ाने और आंतों की गति को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे मल त्याग आसान हो सकता है और कब्ज की समस्या कम करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि इसके साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
2. वजन नियंत्रित रखने में मददगार
फाइबर युक्त भोजन खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है। इससे बार-बार भूख लगने और अनावश्यक खाने की आदत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इस तरह चोकरयुक्त आटा वजन प्रबंधन के लिए उपयोगी हो सकता है।
3. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर भोजन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। खासतौर पर संतुलित आहार के हिस्से के रूप में साबुत अनाज का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
4. ब्लड शुगर को संभालने में सहायक
चोकरयुक्त आटे में मौजूद फाइबर भोजन के पाचन और कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति को प्रभावित करता है। इससे कुछ परिस्थितियों में भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फाइबर युक्त साबुत अनाज बेहतर भोजन विकल्प हो सकता है।
5. आंतों की सेहत को देता है समर्थन
फाइबर का कुछ हिस्सा आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। इससे आंतों के माइक्रोबायोम को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
कितना चोकर खाना चाहिए?
एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 25 से 30 ग्राम या उससे अधिक आहार फाइबर की जरूरत हो सकती है। यह जरूरत उम्र, लिंग और कुल खानपान के अनुसार अलग-अलग होती है।
चोकर की कोई एक निश्चित मात्रा सभी लोगों के लिए जरूरी नहीं है। अगर आप अलग से चोकर इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो शुरुआत थोड़ी मात्रा से करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं।
सबसे आसान तरीका है कि बाजार से अत्यधिक छना हुआ आटा लेने के बजाय साबुत गेहूं पिसवाएं और चक्की के आटे को बिना छाने इस्तेमाल करें। इससे गेहूं का प्राकृतिक चोकर भोजन में बना रहता है।
चोकर को खाने में शामिल करने के आसान तरीके
चोकर को सिर्फ रोटी के आटे तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। इसे कई तरीकों से भोजन में शामिल किया जा सकता है।
- गेहूं के आटे में साफ और खाने योग्य चोकर मिलाकर रोटियां बनाएं।
- दलिया में थोड़ी मात्रा में चोकर शामिल कर सकते हैं।
- दही या छाछ के साथ भुना हुआ चोकर मिलाकर खा सकते हैं।
- सब्जियों और सलाद के साथ भी थोड़ी मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- घर पर बनने वाले कुछ फाइबर युक्त नाश्तों में इसे शामिल कर सकते हैं।
चोकर खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप पहले कम फाइबर वाला भोजन खाते रहे हैं, तो अचानक बहुत अधिक चोकर खाने से गैस, पेट फूलना और पेट में असहजता हो सकती है। इसलिए इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं।
जिन लोगों को सीलिएक रोग है, उन्हें गेहूं और गेहूं के चोकर से परहेज करना चाहिए क्योंकि इसमें ग्लूटेन होता है। वहीं IBS या आंतों से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेनी चाहिए।
सफेद आटे के बजाय साबुत अनाज को दें प्राथमिकता
सेहतमंद रहने के लिए खानपान में छोटे-छोटे बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। साबुत गेहूं और चोकरयुक्त आटा शरीर को फाइबर देने का आसान माध्यम हैं। इन्हें संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
इसलिए अगली बार आटा खरीदते या पिसवाते समय केवल उसकी सफेदी और बारीकी पर ध्यान न दें, बल्कि उसमें मौजूद पोषक तत्वों को भी महत्व दें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। चोकर किसी बीमारी का इलाज नहीं है। पाचन संबंधी गंभीर समस्या या विशेष आहार संबंधी जरूरत होने पर चिकित्सक अथवा योग्य पोषण विशेषज्ञ से सलाह लें।
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