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जिस​​​ हीरे को पहनने से जुड़ी हैं कई​​​​​​ त्रासदियां, कभी राजघराने की शान रहा यह बेशकीमती रत्न आज भी है रहस्य

जिस​​​ हीरे को पहनने से जुड़ी हैं कई​​​​​​ त्रासदियां, कभी राजघराने की शान रहा यह बेशकीमती रत्न आज भी है रहस्य

दुनिया में कई ऐसी बेशकीमती चीजें हैं, जिनके साथ रहस्यमयी कहानियां जुड़ी हुई हैं। इनमें एक नाम मशहूर ब्लू होप डायमंड (Blue Hope Diamond) का भी है। गहरे नीले रंग का यह हीरा अपनी खूबसूरती और बेशुमार कीमत के साथ-साथ कथित श्राप की कहानी को लेकर भी चर्चा में रहा है। कहा जाता है कि इसके कई पुराने मालिकों की जिंदगी में बड़ी परेशानियां आईं और कुछ परिवारों को दुखद घटनाओं का सामना करना पड़ा।

इस हीरे की कहानी भारत से शुरू होकर फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका तक पहुंचती है। हालांकि, इसके श्रापित होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि इस हीरे से जुड़ी कई लोकप्रिय कहानियों में ऐतिहासिक तथ्यों और लोककथाओं को मिला दिया गया है।

भारत की खदान से निकला था यह मशहूर नीला हीरा

होप डायमंड की शुरुआती कहानी 17वीं शताब्दी से जुड़ी है। स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, फ्रांसीसी व्यापारी और यात्री जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर ने भारत से एक बड़ा नीला हीरा हासिल किया था। माना जाता है कि यह हीरा गोलकुंडा क्षेत्र की कोल्लूर खदान से निकला था, हालांकि इसके सटीक स्रोत और प्राप्ति के समय को लेकर पूरी तरह निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

टैवर्नियर ने 1668 में यह हीरा फ्रांस के राजा लुई चौदहवें को बेचा था। बाद में 1673 में शाही जौहरी ने इसे दोबारा तराशा। उस समय यह फ्रांस के शाही खजाने का हिस्सा बन गया और इसे ‘फ्रेंच ब्लू’ के नाम से जाना जाने लगा।

कुछ लोकप्रिय कहानियों में दावा किया जाता है कि टैवर्नियर ने यह हीरा भारत में किसी देवी-देवता की मूर्ति से चुराया था और इसी वजह से इसे श्राप मिला। लेकिन इस दावे की पुष्टि करने वाला विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला है।

फ्रांस की क्रांति के दौरान अचानक गायब हो गया हीरा

फ्रांस के शाही परिवार के पास रहने के बाद इस हीरे का इतिहास एक बड़े घटनाक्रम से जुड़ गया। 1792 में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान शाही खजाने से कई कीमती गहने चोरी हो गए। इनमें फ्रेंच ब्लू हीरा भी शामिल था।

इसके बाद कई वर्षों तक इस हीरे का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। वर्ष 1812 में लंदन में एक बड़े नीले हीरे का जिक्र सामने आया, जिसे पहले वाले फ्रेंच ब्लू का नया रूप माना जाता है। बाद में यह हीरा ब्रिटिश रत्न संग्रहकर्ता हेनरी फिलिप होप के पास पहुंचा। उन्हीं के नाम पर आगे चलकर इसका नाम ‘होप डायमंड’ पड़ा।

पियरे कार्टियर ने हीरे के साथ जोड़ी श्राप की कहानी

20वीं शताब्दी की शुरुआत में यह हीरा कई व्यापारियों के हाथों से गुजरता हुआ फ्रांसीसी जौहरी पियरे कार्टियर तक पहुंचा। कार्टियर ने इसे बेचने के लिए इसकी रहस्यमयी कहानी को भी खूब प्रचारित किया।

कहा जाता है कि हीरे के साथ दुर्भाग्य की कहानियां सुनकर अमेरिकी अमीर महिला एवलिन वॉल्श मैकलीन की इसमें दिलचस्पी बढ़ गई थी। उन्होंने आखिरकार 1911-12 के दौरान इसे खरीद लिया। एवलिन को यह हीरा इतना पसंद था कि वह इसे अक्सर पार्टियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहनती थीं।

यहीं से होप डायमंड के श्राप की कहानी और ज्यादा मशहूर होने लगी।

एवलिन मैकलीन की जिंदगी में आईं कई दुखद घटनाएं

एवलिन मैकलीन की जिंदगी में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्हें बाद में इस हीरे के कथित श्राप से जोड़कर देखा जाने लगा।

वर्ष 1919 में उनके नौ साल के बेटे विंसन की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। इसके बाद उनके वैवाहिक जीवन में भी परेशानियां आईं। उनके पति नेड मैकलीन की जिंदगी में कई समस्याएं रहीं और बाद में उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया गया।

1946 में एवलिन की बेटी की भी दवा के ओवरडोज से मौत हो गई। इन घटनाओं ने एवलिन को गहरा सदमा पहुंचाया। आखिरकार 1947 में निमोनिया के कारण उनका निधन हो गया।

क्योंकि एवलिन लंबे समय तक होप डायमंड पहनती रही थीं, इसलिए इन दुखद घटनाओं को हीरे के कथित श्राप से जोड़ दिया गया। हालांकि, इन घटनाओं और हीरे के बीच किसी वास्तविक संबंध का कोई प्रमाण नहीं है।

अब कहां रखा है करोड़ों का यह हीरा?

एवलिन मैकलीन की मौत के बाद उनकी कीमती ज्वेलरी कलेक्शन को बेच दिया गया। वर्ष 1949 में मशहूर अमेरिकी जौहरी हैरी विंस्टन ने होप डायमंड को खरीदा। इसके बाद उन्होंने इसे कई प्रदर्शनियों में दिखाया।

10 नवंबर 1958 को हैरी विंस्टन ने यह हीरा अमेरिका के स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री को दान कर दिया। आज यह हीरा वहीं सुरक्षित रखा गया है और दुनिया भर से आने वाले पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं।

इस हीरे का वजन 45.52 कैरेट है। इसके चारों ओर छोटे सफेद हीरों की सजावट इसे और आकर्षक बनाती है। स्मिथसोनियन के मुताबिक, यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध गहरे नीले हीरों में से एक है।

क्या सचमुच श्रापित है होप डायमंड?

होप डायमंड के श्राप की कहानी आज भी लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इतिहासकारों और स्मिथसोनियन के शोधकर्ताओं ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। हीरे के मालिकों के साथ हुई कुछ दुखद घटनाओं को चुनकर उनके साथ श्राप की कहानी जोड़ दी गई।

इतिहास में ऐसे भी कई मालिक रहे हैं जिनके बारे में श्राप से जुड़ी कहानियां प्रमाणित नहीं हैं। यहां तक कि कुछ चर्चित घटनाओं के विवरण भी गलत पाए गए। उदाहरण के लिए, एक समय खबर फैली थी कि हीरे के मालिक सेलिम हबीब की समुद्री हादसे में मौत हो गई, जबकि स्मिथसोनियन के रिकॉर्ड के अनुसार उस हादसे में मरने वाला व्यक्ति कोई दूसरा था।

यानी होप डायमंड की असली खासियत उसका दुर्लभ नीला रंग, लंबा इतिहास और बेशकीमती होना है। श्राप की कहानी ने जरूर इसे रहस्य और रोमांच से भर दिया, लेकिन इसके पीछे किसी अलौकिक शक्ति का प्रमाण आज तक सामने नहीं आया है।

Satya Report डिस्क्लेमर: होप डायमंड से जुड़ी श्राप की कहानी ऐतिहासिक लोककथाओं और लोकप्रिय मान्यताओं पर आधारित है। इसके श्रापित होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेख में ऐतिहासिक विवरणों के लिए स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के रिकॉर्ड का संदर्भ लिया गया है।

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