
पेरिस, फ्रांस: फ्रांस में महंगाई, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ लगातार तीसरे सप्ताहांत हजारों लोग सड़कों पर उतरे। ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन रैलियां खत्म होने के दौरान पेरिस समेत कई शहरों में नकाब पहने कुछ लोगों ने हिंसा और तोड़फोड़ शुरू कर दी। कहीं पुलिस पर पत्थर फेंके गए तो कहीं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इस दौरान काले कपड़ों में चेहरा छिपाए कुछ लोगों के हाथों में हथौड़े भी नजर आए।
हैलोवीन के मौके पर कुछ प्रदर्शनकारी डरावने किरदारों की पोशाक में भी दिखाई दिए। हिंसा की इन घटनाओं के बीच फ्रांस में एक शब्द की चर्चा तेज हो गई है—’कैसर्स’। आखिर ये लोग कौन हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच हिंसा कैसे भड़क जाती है?
कौन होते हैं फ्रांस के ‘कैसर्स’?
फ्रांस में ‘कैसर्स’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जो प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल होते हैं। फ्रांसीसी भाषा में इसका अर्थ तोड़फोड़ करने वालों से जुड़ा है।
ये कोई एक पंजीकृत संगठन या औपचारिक राजनीतिक पार्टी नहीं हैं। अलग-अलग छोटे समूहों में सक्रिय लोग इस नाम से पहचाने जाते हैं। कई बार इनका संबंध कट्टर वामपंथी विचारधारा और अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों से बताया जाता है। हालांकि, हिंसा में शामिल हर व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा या पृष्ठभूमि एक जैसी नहीं होती।
इनमें से कुछ लोग अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर नकाब, चश्मे और काले कपड़े पहनते हैं। बड़े प्रदर्शनों के दौरान ये अक्सर मुख्य जुलूस के किनारे या उसके अंतिम हिस्से में सक्रिय होते हैं। इनकी गतिविधियों में पुलिस से टकराव, पत्थरबाजी और दुकानों या सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं।
31 अक्टूबर को पेरिस में कैसे बिगड़े हालात?
31 अक्टूबर 2026 को फ्रांस के कई शहरों में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में करीब 3.20 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जिनमें लगभग 70 हजार पेरिस में थे।
अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन पेरिस में पोर्टे डी शारांटों के आसपास स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब नकाब पहने लोगों के एक समूह ने सड़क से पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंकने शुरू कर दिए। कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों की ओर आग लगाने वाले उपकरण भी फेंके।
पुलिस ने जवाब में आंसू गैस और दूसरे नियंत्रणकारी साधनों का इस्तेमाल किया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई। फ्रांस के अधिकारियों ने हिंसा में शामिल लोगों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए थे।
हैलोवीन की पोशाकों के बीच छिपे चेहरे
इस बार प्रदर्शनों के दौरान हैलोवीन का त्योहार भी चर्चा में रहा। कुछ लोग स्पाइडरमैन, फ्रैंकेंस्टाइन और अन्य काल्पनिक किरदारों की पोशाक पहनकर सड़कों पर पहुंचे। कई लोगों ने चेहरे पर मुखौटे भी लगाए थे।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरां नूनेज ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पहचान छिपाने के लिए चेहरा ढककर उपद्रव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। सरकार को सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश भी मिले थे, जिनमें हैलोवीन की रात लोगों से सड़कों पर उतरने और हिंसक गतिविधियों में शामिल होने की अपील की गई थी।
हालांकि, केवल मुखौटा पहनने या हैलोवीन की पोशाक में होने से किसी व्यक्ति को हिंसा में शामिल नहीं माना जा सकता। कार्रवाई का आधार उसकी वास्तविक गतिविधियां और उपलब्ध साक्ष्य होते हैं।
क्या इन समूहों का संबंध प्रवासियों से है?
कैसर्स को लेकर एक सवाल यह भी उठता है कि क्या इनका संबंध अप्रवासी समुदायों से है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसे किसी दावे के समर्थन में ठोस आधार सामने नहीं आया है। इन हिंसक समूहों में फ्रांस के नागरिक और अलग-अलग कट्टर विचारधाराओं से जुड़े युवा भी शामिल बताए जाते हैं।
इसलिए हिंसा में शामिल लोगों की पहचान को किसी एक समुदाय या प्रवासी समूह से जोड़ना सही नहीं होगा। प्रदर्शन में शामिल शांतिपूर्ण लोगों और तोड़फोड़ करने वाले समूहों के बीच अंतर करना भी जरूरी है।
महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ क्यों हो रहे प्रदर्शन?
फ्रांस में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के पीछे कई मुद्दे हैं। इनमें जीवनयापन की बढ़ती लागत, महंगाई, आर्थिक असमानता, आवास की समस्या और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर नाराजगी शामिल है।
इन प्रदर्शनों में छात्र, ट्रेड यूनियन और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग भी शामिल हुए हैं। समय के साथ पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की घटनाओं के बाद नागरिक अधिकारों और विरोध करने की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा बन गए।
17 और 24 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान भी कई शहरों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद 31 अक्टूबर को तीसरे सप्ताहांत भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। फ्रांस के गृह मंत्रालय ने इस दिन देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों की तैनाती की थी।
500 से ज्यादा गिरफ्तारियां, आगे भी प्रदर्शन की तैयारी
31 अक्टूबर के प्रदर्शनों के बाद फ्रांस में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। अलग-अलग समय पर जारी आधिकारिक और मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तारियों का आंकड़ा 500 से अधिक बताया गया। अधिकारियों ने कई शहरों में हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की जांच शुरू की।
इस बीच छात्र संगठनों और मजदूर समूहों ने नवंबर के पहले सप्ताह में भी विरोध प्रदर्शन और शिक्षण संस्थानों को बंद कराने की अपील की है। ऐसे में फ्रांस की सरकार के सामने एक तरफ लोगों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को बनाए रखने और दूसरी तरफ हिंसा तथा तोड़फोड़ रोकने की चुनौती है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर फ्रांस के गृह मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण समूहों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच अंतर करना जरूरी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर घटनाओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।



