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Mohini Ekadashi 2026: Lord Vishnu की कृपा के लिए जानें सही Puja Vidhi, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Mohini Ekadashi 2026: Lord Vishnu की कृपा के लिए जानें सही Puja Vidhi, शुभ मुहूर्त और मंत्र
Mohini Ekadashi 2026: Lord Vishnu की कृपा के लिए जानें सही Puja Vidhi, शुभ मुहूर्त और मंत्र
Satya Report:

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। साल में कुल 24 एकादशी आती है, इस साल अधिक मास के कारण 26 एकादशी आएंगी। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश निकला था, जिसे पाने के लिए राक्षस और देवता के बीच लड़ाई हुई। जिसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और धर्म की रक्षा की। तभी से इस तिथि को मोहिनी एकादशी कहा जाने लगा। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से आपको मोह माया से छुटकारा मिल जाता है। आइए आपको पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों के बारे में बताते हैं।
मोहिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, मोहिनी एकादशी का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.53 बजे से दोपहर 12.45 बजे तक, दूसरा अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त प्रात: काल 05.44 बजे से सुबह 7.23 बजे तक, तीसरा ब्रह्म मुहूर्त  प्रात काल 04:17 बजे से 05:01 बजे तक। व्रत के पारण का समय 28 अप्रैल, सुबह 05:47 बजे से सुबह 08:21 बजे।
मोहिनी एकादशी की पूजा विधि
सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। साफ या पीले वस्त्र धारण करें। अब आप पूजा घर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति स्थापित करें।
हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें कि आप अपनी मनोकामना की पूर्ति या प्रभु भक्ति के लिए यह व्रत कर रहे हैं।
इसके बाद भगवान की मूर्ति को गंगाजल और फिर पंचामृत से अभिषेक कराएं।
अब साफ जल से स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं।
भगवान विष्णु को पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल, इसके बाद वैजयंती के फूल को अर्पित करें। 
शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित करें। भगवान को पीले फलों और मिठाई का भोग अर्पित करें।
इसके बाद भगवान विष्णु के भोग में तुलसी अनिवार्य है, क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते हैं।
इन मंत्रों का जाप करें
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
स्तुति मंत्र’शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं’ अर्थ है जिनकी आकृति अति शांत है , जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी ईश्वर हैं, उन संपूर्ण जगत के स्वामी और भय का नाश करने वाले श्री विष्णु को मैं प्रणाम करता हूं।
मोहिनी स्वरुप का ध्यान मंत्र “ॐ मोहिनी स्वरूपाय नमः” इसका अर्थ है, भगवान के उस मोहिनी स्वरुप को नमस्कार है, जो अज्ञानता और अंधकार को हर लेता है और साधक को सत्य के मार्ग पर ले जाता है। 

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