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Mohini Ekadashi 2026 : मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा से मिलेगी पापों से मुक्ति, जरूर पढ़ें यह चमत्कारी Vrat Katha

Mohini Ekadashi 2026 : मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा से मिलेगी पापों से मुक्ति, जरूर पढ़ें यह चमत्कारी Vrat Katha
Mohini Ekadashi 2026 : मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा से मिलेगी पापों से मुक्ति, जरूर पढ़ें यह चमत्कारी Vrat Katha
Satya Report:

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। साल भर 24 एकादशी तिथि आती हैं और हर महीने 2 एकादशी तिथि है। इस साल अधिक मास के कारण 26 एकादशी तिथि आएंगी। यह व्रत भगवान विष्णु को सर्पित है। आज यानी 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन विधिवत रुप पूजा करना और व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुखसमृद्धि बनीं रहती है। इस भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा बरसती है। यदि आप भी श्री विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो मोहिनी एकादशी के दिन कथा का पाठ जरुर करें।
मोहिनी एकादशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सरस्वती नदी के पास एक नगर था, जिसका नाम भद्रावती था। इस नगर के राज का नाम धृतिमान था। इस नगर में एक धनी वैश्य धनपाल रहता था। वह बहुत परोपकारी और भगवान विष्णु का भक्त था। उसके 5 पुत्र थे। जो सबसे छोटा बेटा धृष्टबुद्धि पापी था। वह जुआ खेलता था। वह हमेशा पिता की धनसंपत्ति को बर्बाद करता रहता था। इस समस्या परेशान होकर पिता ने उसे अपने घर से निकाल दिया। जिसके बाद वह दरदर भटकने लगा। उसके पास कुछ भी खाने को नहीं था। वह चोरी करने लगा। राजा ने उसे कारागार में डाल दिया। बाद में उसको नगर से बाहर निकाल दिया गया।
एक दिन वह जंगल में भटकते हुए कौण्डिन्य ऋषि के आश्राम पहुंचा। उसने ऋषि से अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए कोई उपाय पूछा। तब ऋषि ने वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि ने कहा कि इस व्रत के करने से जन्मजन्मांतर के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
जिसके बाद से उसने विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी व्रत किया। इस व्रत को करने से उसको सभी पापों से मुक्ति मिल गई और भगवान विष्णु के लोक ‘वैकुण्ठ’ को प्राप्त हुआ।
भगवान विष्णु के मंत्र
ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।
यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।
वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |
पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी ।।
एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |
य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत।।
  ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् 

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