Madhya Pradesh

Mothers Day 2026: अपराधियों से भिड़तीं, बच्चों को संभालतीं कहानी इन सुपर कॉप मॉम्स की

ऐसी महिलाओं का कहानी बता रहे हैं, जो नौकरी, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी को एक साथ बखूबी निभा रही हैं. भोपाल में महिला पुलिसकर्मियों की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो मां की ममता और वर्दी के फर्ज दोनों को एक साथ बखूबी निभा रही हैं. थाने की जिम्मेदारियों के बीच अपने छोटे बच्चों को संभालती ये महिला आरक्षक हर दिन संघर्ष, समर्पण और जिम्मेदारी की नई मिसाल पेश कर रही हैं.

Mothers Day 2026: अपराधियों से भिड़तीं, बच्चों को संभालतीं कहानी इन सुपर कॉप मॉम्स की
Mothers Day 2026: अपराधियों से भिड़तीं, बच्चों को संभालतीं कहानी इन सुपर कॉप मॉम्स की

पुलिस की नौकरी वैसे ही चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, लेकिन जब इसके साथ मां होने की जिम्मेदारी जुड़ जाती है तो हालात और कठिन हो जाते हैं. इसके बावजूद भोपाल की कई महिला पुलिसकर्मी अपने साथ बच्चों को लेकर थाने आती हैं और पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करती हैं.

वर्दी के पीछे मां की ममता

कहीं महिला आरक्षक रिपोर्ट लिखते समय अपने बच्चे पर नजर रखती दिखाई देती हैं, तो कहीं वायरलेस सेट संभालते हुए बच्चे को चुप कराती नजर आती हैं. थाने के भीतर की ये तस्वीरें बताती हैं कि वर्दी के पीछे एक मां का दिल भी धड़कता है.

मां, पुलिस और पत्नी की निभा रहीं जिम्मेदारी

महिला आरक्षक दीप्ति बघेल साल 2018 से पुलिस सेवा में हैं. उनकी साढ़े तीन साल की बेटी लावण्या अक्सर मां के साथ थाने पहुंचती है. पति भी पुलिस विभाग में पदस्थ हैं और परिवार दूसरे शहर में रहता है. ऐसे में बच्ची की देखभाल सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है. घर का काम, परिवार की देखरेख और फिर घंटों की पुलिस ड्यूटी. दीप्ति हर भूमिका को मजबूती से निभा रही हैं.

पुलिसकर्मी के साथ निभा रहीं मां की जिम्मेदारी

ऐसा ही कुछ हाल महिला आरक्षक अनीता लोधी का भी है, जो 2011 से खाकी पहनकर समाज की सेवा कर रही हैं. उनके पति प्राइवेट नौकरी में हैं और ससुरालमायका दूर होने के कारण बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह अनीता पर ही. उनके दो बच्चे हैं, जिनमें पांच साल का बेटा अभिनव अक्सर उनके साथ थाने में ही समय बिताता है. कई बार स्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें घर में ताला लगाकर ड्यूटी पर आना पड़ता है. थाने के माहौल में ही अभिनव अपनी मां की निगरानी में बड़ा हो रहा है, जहां अनीता एक तरफ अपराधियों से निपटती हैं और दूसरी तरफ अपने बेटे की परवरिश भी कर रही हैं.

एक साथ संभाल रही तीन जिम्मेदारियां

इस संघर्ष की एक और कड़ी हैं महिला आरक्षक वंदना उइके, जिनकी जिंदगी घर, अस्पताल और थाने के त्रिकोण में फंसी हुई है. वंदना न केवल अपने सात साल के बेटे चिराग को संभाल रही हैं, बल्कि अपनी गंभीर रूप से बीमार सास की सेवा की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है. पति प्राइवेट नौकरी करते हैं और पूरी जिम्मेदारी वंदना के कंधों पर है. स्कूल की छुट्टियों के दौरान चिराग पूरा दिन अपनी मां के साथ थाने में ही रहता है।

​ये ही नहीं ऐसी अनेकों महिला पुलिसकर्मी है जो सिर्फ कानून की रक्षक ही नहीं, बल्कि एक सशक्त मां के रूप में भी समाज के सामने खड़ी हैं. जब वायरलेस की आवाजों के बीच किसी मासूम की खिलखिलाहट सुनाई देती है, तब यह एहसास होता है कि एक महिला पुलिसकर्मी सिर्फ व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अपने परिवार का भविष्य भी उतनी ही मजबूती से संभाल रही है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply