
कुशीनगर। नेपाल से मिली सूचना के बाद नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर की आशंका ने कुशीनगर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नदी के तटवर्ती और रेता क्षेत्र के गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित बाढ़ को देखते हुए ग्रामीणों और उनके मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। करीब 70 हजार लोगों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
डीएमएसपी ने किया तटवर्ती गांवों और बैराज का निरीक्षण
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के साथ नारायणी नदी के तटवर्ती और संवेदनशील गांवों के साथ वाल्मीकिनगर बैराज का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर नदी की स्थिति और तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। डीएम ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें सतर्क रहने और नदी तथा निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने लोगों से कहा कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में उन्हें तत्काल ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
इन जगहों पर नदी का दबाव
प्रशासन के मुताबिक नरवा जोत एपी बांध के किलोमीटर 3.00 से 4.00, किलोमीटर 10.518 स्थित स्पर और किलोमीटर 13.000 से 14.500 के बीच नदी का दबाव बना हुआ है। संवेदनशील बिंदुओं पर बाढ़ खंड की ओर से जियो बैग और परक्यूपाइन लगाकर सुरक्षा उपाय किए गए हैं। विभागीय अभियंता और कर्मचारी लगातार तटबंधों की निगरानी कर रहे हैं।
सामान समेटने लगे ग्रामीण, किसानों को लौटाया गया
बुधवार को अधिकारियों की टीम नदी पार स्थित शिवपुर गांव और तटबंधों पर पहुंची। नारायनपुर, शिवपुर, सालिकपुर और मरचहवा समेत कई गांवों में नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई। कुछ लोग जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे, जबकि खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों को भी वापस बुला लिया गया। मरचहवा गांव के दक्षिण टोला के ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बाढ़ में ही रास्ते पानी में डूब जाते हैं। ऐसे में भारी बाढ़ आने पर सड़क संपर्क पूरी तरह कट सकता है और बच्चों, महिलाओं तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
36 गेट खोले गए, 1.42 लाख क्यूसेक तक पहुंचा डिस्चार्ज
जिला प्रशासन के अनुसार वाल्मीकि गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। बुधवार रात आठ बजे बैराज से पानी का डिस्चार्ज करीब 1.04 लाख क्यूसेक था, जो रात 9:30 बजे बढ़कर 1,36,700 क्यूसेक और रात 10 बजे 1,42,100 क्यूसेक तक पहुंच गया। अपर स्ट्रीम में नदी का जलस्तर 354.90 फीट और डाउन स्ट्रीम में 352.30 फीट दर्ज किया गया। स्थिति को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को आवश्यक राहत एवं बचाव उपकरणों के साथ अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है।
सात गांवों में अलर्ट, पीएसी की दो प्लाटून तैनात
पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए खड्डा, हनुमानगंज, तरयासुजान और सेवरही थानों की पुलिस को अलर्ट किया गया है। बाढ़ की आशंका वाले सात गांवों के लोगों को सतर्क किया गया है। इसके अलावा दो प्लाटून पीएसी तैनात की गई हैं, जबकि दो और प्लाटून की मांग की गई है। थाना प्रभारियों, बीडीओ और मुख्य सेविकाओं को लाउडस्पीकर के जरिए ग्रामीणों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
पेयजल और अन्य सुविधाओं की भी तैयारी
प्रशासन ने संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पेयजल, मोबाइल टॉयलेट और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। राजस्व टीम और बाढ़ खंड के अभियंता लगातार संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने, नदी के किनारे अनावश्यक रूप से नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।


