अक्सर माना जाता है कि हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या केवल मोटे या अधिक वजन वाले लोगों को होती है. लेकिन ऐसा नहीं है. शरीर से पतला दिखने वाला व्यक्ति भी हाई कोलेस्ट्रॉल से परेशान हो सकता है. डॉ. अमर सिंघल कहते हैं कि कोलेस्ट्रॉल का संबंध केवल वजन से नहीं, बल्कि आनुवंशिक कारणों, खानपान, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली से भी होता है. इसलिए दुबलेपतले लोगों को भी समयसमय पर अपना लिपिड प्रोफाइल जरूर जांचना चाहिए.

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी वसा जैसा पदार्थ है, जो हार्मोन और कोशिकाओं के निर्माण में भूमिका निभाता है. समस्या तब होती है जब शरीर में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है. लंबे समय तक एलडीएल का स्तर अधिक रहने पर धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है.
पतले लोगों में बैड कोलेस्ट्रॉल के कारण
जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं कुछ लोगों में परिवार से मिलने वाली आनुवंशिक स्थिति के कारण कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ रहता है. इसे फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया कहा जाता है. ऐसे लोगों का वजन सामान्य या कम हो सकता है, फिर भी उनका एलडीएल कोलेस्ट्रॉल काफी अधिक हो सकता है. परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या हार्ट अटैक का इतिहास होने पर जांच को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है.
खानपान और लाइफस्टाइल का असर पतले होने का मतलब यह नहीं है कि खानपान स्वस्थ है. अधिक मात्रा में तलाभुना भोजन, ट्रांस फैट, संतृप्त वसा, फास्ट फूड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को प्रभावित कर सकता है. इसी तरह शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और अत्यधिक तनाव भी हृदय स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं.
लक्षणों का इंतजार न करें
हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर साइलेंट समस्या कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. व्यक्ति बिल्कुल स्वस्थ महसूस कर सकता है और फिर भी उसका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ हो सकता है. इसलिए केवल शरीर के वजन या बाहरी फिटनेस को देखकर कोलेस्ट्रॉल का अंदाजा लगाना सही नहीं है.
एक्सपर्ट ने बताया क्या करें?
बैलेंस डाइट लें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान से बचें और समयसमय पर लिपिड प्रोफाइल की जांच कराएं. यदि जांच में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ मिलता है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही आगे की रणनीति तय करें. कुछ लोगों में केवल जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त हो सकता है, जबकि आनुवंशिक या अधिक जोखिम वाले मामलों में दवा की जरूरत भी पड़ सकती है. इसलिए याद रखें, पतला शरीर हमेशा स्वस्थ कोलेस्ट्रॉल का संकेत नहीं होता. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए वजन के साथसाथ कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य मानकों की नियमित निगरानी भी जरूरी है.



