CrimeIndiaTrending

नई-नई शादी, अचानक आया एक पैकेट और फिर मच गया हड़कंप; आखिर किसने रची थी खौफनाक साजिश?

नई-नई शादी, अचानक आया एक पैकेट और फिर मच गया हड़कंप; आखिर किसने रची थी खौफनाक साजिश?

क्राइम की इस कहानी में आज हम जानेंगे ओडिशा वेडिंग बम केस के बारे में जिसने एक पल में हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया. आखिर उस पार्सल में ऐसा क्या था और किसने उसे भेजा था.

Odisha Parcel Bomb Blast: ओडिशा के बलांगीर जिले के पटनागढ़ में एक परिवार नई-नई शादी की खुशियों में डूबा हुआ था. घर में रिश्तेदारों और मेहमानों के लिए दिए गए उपहारों का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ था. इसी बीच एक और पार्सल घर पहुंचा. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह साधारण-सा दिखने वाला पैकेट कुछ ही पलों में खुशियों को मातम में बदल देगा.

नवविवाहित सॉफ्टवेयर इंजीनियर सौम्य शेखर साहू की शादी फरवरी 2018 को रीमा रानी साहू से हुई थी. दोनों ने उस पार्सल को शादी का तोहफा समझकर खोला. लेकिन जैसी ही पैकेट खुला, जोरदार धमाका हुआ. विस्फोट इतना भयानक था कि सौम्य शेखर और उनकी बुजुर्ग रिश्तेदार जेमामणि साहू की मौत हो गई, जबकि रीमा गंभीर रूप से घायल हो गईं. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और यह केस ओडिशा वेडिंग बम  के नाम से मशहूर हो गया.

आखिर उस पार्सल में क्या था?

जांच में पता चला कि पार्सल के अंदर विस्फोटक सामग्री से बना एक बम छिपाया गया था, जिसे बेहद चालाकी से गिफ्ट पैक की तरह तैयरा किया गया था. इसे खोलते ही विस्फोट हो जाए, इसकी पूरी व्यवस्था की गई थी.  शुरुआती जांच में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था और मामला एक रहस्य बन गया था.

कैसे सामने आया मास्टरमाइंड का नाम?

करीब दो महीने बाद ओडिशा क्राइम ब्रांच की जांच में बड़ा मोड़ आया. संदेह कि सुई ज्योति विकास कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल और अंग्रेजी के व्याख्याता पुंजीलाल मेहर की ओर गई. जांच एजेंसियों ने पाया कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम और अलग शहर का इस्तेमाल किया था. बाद में कई फोरेंसिक और तकनीकी सबूत उसके खिलाफ मिले.

आखिर  क्यों रची गई थी इतनी खौफनाक साजिश?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, पुंजीलाल मेहर और सौम्य शेखर की मां संजुक्ता साहू एक ही कॉलेज में काम करते थे. संजुक्ता साहू के कॉलेज की प्रिंसिपल बनने के बाद पुंजीलाल के मन में गहरी नाराजगी और पेशेवर ईर्ष्या पैदा हो गई थी. इसदी बदले की भावना में उसने पूरे परिवार को निशाना बनाने की साजिश रची.

सात साल बाद मिला न्याय

लंबी सुनवाई और 62 गवाहों के बयान के बाद मई 2025 में पटनागढ़ की अदालत ने पुंजीलाल मेहर को दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने माना कि यह सुनियोजित और बेहद क्रूर अपराध था, हालांकि इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में नहीं माना गया.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply