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गाड़ी में अब सो नहीं पाएंगे ड्राइवर, हिलने लगेगी कार की सीट, IIT मद्रास ने बनाई खास ‘इंटेलिसीट’, ऐसे बचाएगी जान..?

गाड़ी में अब सो नहीं पाएंगे ड्राइवर, हिलने लगेगी कार की सीट, IIT मद्रास ने बनाई खास 'इंटेलिसीट', ऐसे बचाएगी जान!

हाईवे पर देर रात एक छोटी सी झपकी के कारण बहुत लोगों की जान चली जाती है. इस तरह के हादसों को रोकने के लिए IIT मद्रास ने कमाल की इंटेलिसीट विकसित की है.

भारत की सड़कें दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में से एक हैं और ज्यादातर हादसों की वजह गाड़ियों की खराबी नहीं, बल्कि इंसानी गलतियां होती हैं. रात के सन्नाटे में अक्सर नींद के कारण आंखें भारी होने लगती हैं और फिर कुछ ही सेकंड की लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हो जाता है. भारत के हाईवे पर होने वाले जानलेवा हादसों में एक बड़ी वजह ड्राइवर्स की नींद होती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए एक इनोवेटिव और स्वदेशी समान खोज निकाला है IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने.

IIT मद्रास के रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने एक ऐसी स्मार्ट सीट तैयार कर ली है, जो ड्राइवर के सोने से ठीक पहले ही उसकी थकान को भांप लेती है और जोरदार अलर्ट देकर एक्सीडेंट होने से बचा लेती है. सबसे कमाल की बात है कि यह बिना कैमरे और तार के काम करती है. तो आइए जानते हैं आखिर क्या है यह इंटेलिसीट टेक्नोलॉजी और यह किस तरह बिना किसी कैमरे या तार के काम करती है.

आईआईटी मद्रास के रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने सीटिंग कंपनी हरिता के साथ मिलकर इस सीट को तैयार किया है, इसका नाम इंटेलिसीट दिया गया है. यह स्मार्ट सीट ड्राइवर के सोने से ठीक पहले ही उसकी थकान को पहचान लेती है और किसी हादसे होने से पहले ही अलर्ट कर देती है. देखने में यह एक नार्मल कार सीट की तरह दिखाई देती है, लेकिन इसके अंदर एडवांस सेंसर लगाए गए हैं.

बिना कैमरा और तार के करेगी काम

मार्केट में मौजूद दूसरी इस तरह की सीटे ड्राइवर पर नजर रखने के लिए कैमरे, सिर पर पट्टी या शरीर पर इलेक्ट्रोड यानी तार का इस्तेमाल करती हैं. वहीं इंटेलिसीट पूरी तरह से नॉन-इंट्रूसिव है. यानी ड्राइवर को शरीर पर कुछ भी पहनने की जरूरत नहीं है.

तो कैसे करती है पहचान

अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि जब कैमरा, सिर पर पट्टी और तार भी नहीं है, तो सीट कैसे ड्राइवर के सोने का पहचान कैसे करती है. इसका जवाब है कि सीट के बैकरेस्ट और बेस में लगे सेंसर, जो ड्राइवर के बैठने के तरीके, उसकी स्थिति और थकान के कारण शरीर में होने वाली हल्की हलचलों को महसूस करते हैं.

सर्फेस इलेक्ट्रोमायोग्राफी मांसपेशियों की थकान मापने के लिए यह सीट शरीर से निकलने वाले हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को समझने का प्रयास करती है. इससे पता चलता है कि पीठ और कंधों की मांसपेशियां कब थकान महसूस कर रही है.

खतरे के हिसाब से 3 लेवल पर अलर्ट

यह सीट ड्राइवर की थकान को तीन चरणों में भांपकर एक्शन में आती है-

हल्की थकान डैशबोर्ड पर एक छोटी सी लाइट जलती है, जो सिर्फ ड्राइवर को सावधान करती है.

थकान लाइट के साथ-साथ एक बीप यानी अलर्ट मिलता है.

ज्यादा थकाम जब स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है, तो सीट खुद कांपने लगती है. इसके साथ ही गाड़ी के मालिक को मोबाइल ऐप पर तुरंत नोटिफिकेशन पहुंच जाता है.

पुरानी गाड़ियों में भी आसानी से होगी फिट

इस सीट की यह खास बात है कि इसे पुरानी गाड़ियों में भी आसानी से फिट किया जा सकता है. इंटेलिसीट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी मौजूदा ट्रक, बस या कार में आसानी से फिट किया जा सकता है. इसके लिए गाड़ी में ज्यादा टेक्निकल बदलाव करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. फिट करने के बाद चाबी ऑन करते ही यह काम करना शुरू कर देती है और मोबाइल ऐप के जरिए रियर-टाइम डेटा भेजती रहती है.

भारत में सड़क हादसों और थके हुए ड्राइवरों की वजह से जाने वाली जानों को बचाने में यह स्वदेशी इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) टेक्नोलॉजी एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है.

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