
कम उम्र में अक्सर लोग अपनी सेहत को लेकर बेफिक्र रहते हैं। माना जाता है कि हार्ट अटैक और दिल की गंभीर बीमारियां बढ़ती उम्र में होती हैं। लेकिन एक मेडिकल अध्ययन ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं। शोध के मुताबिक, 18 से 29 साल की उम्र में भी कुछ लोगों की धमनियों में प्लाक जमा होने के संकेत मिल सकते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है, जो लंबे समय में हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकती है।
हालांकि, धमनियों में प्लाक मिलने का मतलब यह नहीं है कि हार्ट अटैक होना तय है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कम उम्र से ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और जीवनशैली पर ध्यान देना दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
क्या कहती है मेडिकल स्टडी?
द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में डेनमार्क और स्पेन के 18 से 70 वर्ष की उम्र के 16,808 वयस्कों को शामिल किया गया था। अध्ययन में शामिल लोगों को पहले से हृदय रोग होने की जानकारी नहीं थी। शोधकर्ताओं ने आधुनिक इमेजिंग तकनीकों की मदद से उनकी धमनियों में प्लाक की मौजूदगी का आकलन किया।
रिपोर्ट में 18 से 29 वर्ष के पुरुषों में 8.7 प्रतिशत और महिलाओं में 6.7 प्रतिशत में प्लाक पाए जाने की जानकारी दी गई। अध्ययन के सभी आयु वर्गों को मिलाकर 57.1 प्रतिशत प्रतिभागियों में एथेरोस्क्लेरोसिस के संकेत मिले।
इन नतीजों से पता चलता है कि धमनियों में बदलाव कम उम्र में भी शुरू हो सकते हैं और शुरुआती चरण में इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। हालांकि, अध्ययन में प्लाक मिलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर प्रभावित व्यक्ति को भविष्य में हार्ट अटैक आएगा।
आखिर धमनियों में कैसे जमा होता है प्लाक?
एथेरोस्क्लेरोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर धीरे-धीरे प्लाक जमा होने लगता है। यह प्लाक कोलेस्ट्रॉल, वसा, सूजन से जुड़ी कोशिकाओं, रेशेदार ऊतकों और कैल्शियम जैसे पदार्थों से बन सकता है।
इस प्रक्रिया में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल की अहम भूमिका हो सकती है। समय के साथ प्लाक बढ़ने पर धमनियां संकरी हो सकती हैं और रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में प्लाक की सतह पर थक्का बनने से दिल का दौरा या दूसरी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
यह प्रक्रिया आमतौर पर धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। इसलिए केवल किसी तरह की परेशानी महसूस न होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि धमनियां पूरी तरह स्वस्थ हैं।
क्या बचपन से ही बढ़ सकता है हृदय रोगों का जोखिम?
हृदय रोगों का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। अगर किसी व्यक्ति का LDL कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक अधिक रहता है, तो समय के साथ धमनियों में प्लाक बनने का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होना भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। परिवार में कम उम्र में हृदय रोग होने का इतिहास और कुछ आनुवंशिक स्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं।
इसका मतलब है कि दिल की सेहत का ध्यान रखने के लिए किसी निश्चित उम्र तक इंतजार करना जरूरी नहीं है। स्वस्थ आदतों की शुरुआत बचपन और युवावस्था से ही करना बेहतर है।
भारतीय युवाओं के लिए क्यों अहम है यह जानकारी?
भारत में भी युवाओं में मोटापा, डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं चिंता का विषय हैं। आनुवंशिक प्रवृत्ति, खानपान, कम शारीरिक गतिविधि और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
दक्षिण एशियाई लोगों में कभी-कभी सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (BMI) होने के बावजूद पेट और आंतरिक अंगों के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। इसे विसरल फैट कहा जाता है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस और दूसरी मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
इसलिए केवल वजन या BMI देखकर दिल की सेहत का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
युवाओं की बदलती जीवनशैली भी चिंता का विषय
लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम न करना, अधिक कैलोरी वाला भोजन, मीठे पेय पदार्थों का ज्यादा सेवन और तंबाकू का इस्तेमाल स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
खासकर किशोरों और युवाओं में अतिरिक्त वजन के साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल में गड़बड़ी होने पर भविष्य में हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि, किसी एक आदत को हर व्यक्ति में हृदय रोग का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। जोखिम कई कारकों के एक साथ मौजूद होने से भी बढ़ सकता है।
क्या हर युवा को धमनियों की विशेष जांच करानी चाहिए?
नहीं, हर स्वस्थ किशोर या युवा को धमनियों में प्लाक देखने के लिए विशेष इमेजिंग जांच कराने की जरूरत नहीं होती। जांच का फैसला व्यक्ति की उम्र, लक्षणों, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर करते हैं।
जिन लोगों को कम उम्र में हृदय रोग होने की पारिवारिक हिस्ट्री है, या जिन्हें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज अथवा कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें डॉक्टर से उचित स्वास्थ्य जांच के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
बिना चिकित्सकीय जरूरत के महंगी या विशेष जांच कराना जरूरी नहीं है। नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों की पहचान कई लोगों के लिए बचाव की दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
- संतुलित भोजन करें: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और उपयुक्त प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें: अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार पैदल चलने, साइकिल चलाने या अन्य व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- तंबाकू से दूर रहें: धूम्रपान और तंबाकू के अन्य रूप हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाते हैं।
- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान दें: डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर उपचार लें।
- ब्लड शुगर नियंत्रित रखें: डायबिटीज या इसके जोखिम वाले लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच और देखभाल करनी चाहिए।
- पर्याप्त नींद लें: नियमित नींद और तनाव को संभालने की स्वस्थ आदतें अपनाएं।
अगर सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना या अचानक असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो उन्हें नजरअंदाज न करें। संभावित हार्ट अटैक के लक्षण होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। धमनियों में प्लाक मिलने का अर्थ यह नहीं कि हार्ट अटैक होना निश्चित है। अपनी व्यक्तिगत जोखिम स्थिति, जांच और उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह लें।



