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भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी से किसको-कितना फायदा? PM मोदी ने किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर रवाना हो गए हैं. वे 11 जुलाई तक इन देशों की यात्रा करने के बाद स्वदेश वापस लौटेंगे. यात्रा के पहले चरण में पीएम इंडोनेशिया, फिर आस्ट्रेलिया और बाद में न्यूजीलैंड जाएंगे. भारत सरकार का कहना है कि पीएम का यह दौरा एक्ट ईस्ट पॉलिसी को गति देने में मददगार साबित होगा.

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी से किसको-कितना फायदा? PM मोदी ने किया जिक्र

आइए, इसी बहाने समझते हैं कि आखिर क्या है भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी? क्यों पीएम बारबार करते हैं इस पॉलिसी का जिक्र?

क्या है एक्ट ईस्ट पॉलिसी?

एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख हिस्सा है. इसका मकसद दक्षिणपूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत बनाना है. इस नीति के तहत भारत आसियान देशों के साथ आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ा रहा है. आसियान में इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, ब्रुनेई, कंबोडिया, लाओस और म्यांमार शामिल हैं. इसके अलावा भारत जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भी सहयोग बढ़ा रहा है.

लुक ईस्ट से एक्ट ईस्ट तक का सफर

भारत ने वर्ष 1991 में लुक ईस्ट पॉलिसी शुरू की थी. उस समय देश आर्थिक सुधारों के दौर से गुजर रहा था. उद्देश्य था कि एशिया के तेजी से बढ़ते देशों के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाया जाए. साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसे नया रूप दिया. इसका नाम एक्ट ईस्ट पॉलिसी रखा गया. इस बदलाव का मतलब केवल पूर्वी देशों की ओर देखना नहीं था. अब भारत उन देशों के साथ सक्रिय रूप से काम करना चाहता था, यानी बात केवल संवाद की नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की थी.

प्रधानमंत्री मोदी क्यों करते हैं इसका जिक्र?

प्रधानमंत्री मोदी मानते हैं कि भारत का भविष्य एशिया की तेज आर्थिक वृद्धि से जुड़ा है. अगर भारत पूर्वी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाएगा, तो व्यापार बढ़ेगा, निवेश आएगा और नई तकनीक का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही भारत इंडोपैसिफिक क्षेत्र में अपनी भूमिका भी मजबूत करना चाहता है. यह क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरों और अंतरराष्ट्रीय बैठकों में एक्ट ईस्ट पॉलिसी का बारबार उल्लेख करते हैं.

Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modis visit to Indonesia, Australia and New Zealand reflects Indias unwavering commitment to strengthening partnerships across the IndoPacific. Guided by the Act East Policy and the MAHASAGAR Vision, the visit will deepen cooperation for a pic.twitter.com/Ax8xxeSZpg

— Ministry of Ports, Shipping and Waterways July 6, 2026

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह नीति?

भारत की पूर्वी सीमा कई महत्वपूर्ण देशों से जुड़ी है. पूर्वोत्तर भारत भी इसी क्षेत्र के करीब है. अगर इन देशों के साथ बेहतर सड़क, रेल और जल संपर्क बनता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का विकास तेज हो सकता है. इससे वहां उद्योग लगेंगे, पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे.

व्यापार को मिलेगा नया विस्तार

एक्ट ईस्ट पॉलिसी का सबसे बड़ा लाभ व्यापार के क्षेत्र में देखा जा रहा है. भारत अपने उत्पादों को दक्षिणपूर्व एशिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाना चाहता है. इन देशों से निवेश भी आकर्षित करना चाहता है. बेहतर व्यापारिक संबंधों से उद्योगों को नई संभावनाएं मिलती हैं. इससे आर्थिक विकास को गति मिल सकती है.

पूर्वोत्तर भारत बनेगा विकास का केंद्र

इस नीति में पूर्वोत्तर भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. सरकार सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग से संपर्क बढ़ाने पर काम कर रही है. भारतम्यांमारथाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बढ़ेगा. इसका सीधा फायदा स्थानीय व्यापारियों, किसानों और युवाओं को मिल सकता है.

सुरक्षा के लिहाज से भी अहम

भारत के सामने समुद्री सुरक्षा और सीमा सुरक्षा जैसी कई चुनौतियां हैं. हिंद महासागर और इंडोपैसिफिक क्षेत्र में कई देशों की सक्रियता बढ़ रही है. ऐसे में भारत अपने मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है. संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री निगरानी और रक्षा समझौते इसी रणनीति का हिस्सा हैं. इससे क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है.

चीन. फोटो: Pexels

चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच महत्व

पिछले कुछ वर्षों में एशिया में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ा है. ऐसे समय में भारत अपने मित्र देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनाना चाहता है. एक्ट ईस्ट पॉलिसी किसी एक देश के खिलाफ नहीं मानी जाती. इसका उद्देश्य संतुलित और सहयोग पर आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है. भारत स्वतंत्र विदेश नीति के तहत सभी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखना चाहता है.

आसियान देशों के साथ मजबूत रिश्ते

भारत और आसियान देशों के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. बौद्ध धर्म, समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदानप्रदान ने इन रिश्तों को मजबूत बनाया है. आज भारत शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहा है. दोनों पक्ष नियमित रूप से शिखर बैठकें और व्यापारिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं.

सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है. फोटो: Pexels

कनेक्टिविटी पर खास जोर

एक्ट ईस्ट पॉलिसी की सफलता काफी हद तक बेहतर संपर्क व्यवस्था पर निर्भर करती है. सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है. डिजिटल कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया जा रहा है. बेहतर संपर्क से लोगों का आनाजाना आसान होगा. व्यापार की लागत कम होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.

युवाओं और छात्रों को भी फायदा

भारत और पूर्वी एशियाई देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ रहा है. छात्रों के लिए आदानप्रदान कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. शोध, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर काम हो रहा है. इससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और काम करने के नए अवसर मिल सकते हैं.

पर्यटन और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

भारत और दक्षिणपूर्व एशिया के कई देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध बहुत पुराने हैं. बौद्ध तीर्थ, ऐतिहासिक स्थल और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है. पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है. सांस्कृतिक कार्यक्रम दोनों क्षेत्रों के लोगों को एकदूसरे के करीब लाने में मदद करते हैं.

पॉलिसी के सामने कितनी चुनौतियां?

एक्ट ईस्ट पॉलिसी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. कई संपर्क परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं. सीमा क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी विकास कार्यों को प्रभावित करती हैं. क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी कई बार योजनाओं की गति धीमी कर देते हैं. इसके अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी असर पड़ सकता है.

भारत आने वाले वर्षों में इस नीति को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है. नई व्यापारिक साझेदारियां, आधुनिक बुनियादी ढांचा और डिजिटल सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पूर्वोत्तर भारत को एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की भी योजना है. यदि संपर्क परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ता है, तो इस नीति के सकारात्मक परिणाम और स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं.

कब, कहां जाएंगे पीएम मोदी?

  • इंडोनेशिया: 6 से 8 जुलाई 26
  • आस्ट्रेलिया: 8 से 10 जुलाई 26
  • न्यूजीलैंड: 11 जुलाई, 2026

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