अयोध्या : अयोध्या में राम मंदिर के दान, चढ़ावे और वित्तीय लेनदेन को लेकर उठे सवालों के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित शिकायत के आधार पर मांगी गई वित्तीय जानकारी देने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि मामले की एसआईटी जांच चल रही है, इसलिए फिलहाल कोई जानकारी साझा नहीं की जा सकती।

स्थानीय भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, दान, चढ़ावे और भूमि खरीदबिक्री में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने ट्रस्ट की स्थापना से अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की थी।
डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा था। इसके बाद 12 जून को उन्होंने दूसरा पत्र लिखकर राम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई। इसी बीच 13 जून को मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले को अयोध्या जिला प्रशासन के पास भेज दिया। इसके बाद जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर जानकारी मांगी।
सूत्रों के अनुसार, 23 जून को अयोध्या के एडीएम विशु राजा को भेजे गए एक पत्र में एडीएम इंद्रकांत द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने पीएमओ द्वारा मांगी गई जानकारी के संबंध में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क किया था।
पत्र के अनुसार, चंपत राय ने कहा कि मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है और जांच समिति सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं अभिलेखों को एकत्र कर रही है। ऐसे में फिलहाल मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
पीएमओ को भेजी गई शिकायत में डॉ. रजनीश सिंह ने कई वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। इनमें ‘समर्पण निधि’ अभियान के तहत जुटाई गई राशि, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त दान, सोनाचांदी एवं आभूषणों के रूप में मिले योगदान, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का विवरण, भूमि खरीदबिक्री से जुड़े दस्तावेज, मंदिर निर्माण एवं प्रशासनिक खर्च तथा ऑडिट एवं निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं।
हालांकि, अब तक ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों या शिकायतों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।



