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भारत और रूस के बीच बड़ी डील की तैयारी, रेयर अर्थ को लेकर रोसनेफ्ट से बातचीत शुरू

चीन की ओर से रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने इन महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई को पूरा करने के हाथपैर मारना शुरू कर दिया है. इसके लिए प्रयास लगातार कर रहा. इसी क्रम में भारत रूस की तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ साइबेरिया में मौजूद रेयर अर्थ भंडारों के अध्ययन को लेकर बातचीत कर रहा है. यह पहल भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.

भारत और रूस के बीच बड़ी डील की तैयारी, रेयर अर्थ को लेकर रोसनेफ्ट से बातचीत शुरू

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग परमानेंट मैग्नेट बनाने में किया जाता है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होते हैं. भारत फिलहाल अपनी जरूरतों के लिए इन एलीमेंट्स के इंपोर्ट पर काफी हद तक निर्भर है क्योंकि देश में इनके रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग की पर्याप्त व्यावसायिक क्षमता मौजूद नहीं है.

चीन की पाबंदी के बाद बढ़ी चिंता

दुनिया में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का सबसे बड़ा सप्लायर चीन है. हाल के वर्षों में चीन की ओर से निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत सहित कई देशों को सप्लाई संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इससे भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है.

रूस के साथ बढ़ रहा सहयोग

दिसंबर में आयोजित भारतरूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी. रूस के पास दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ भंडारों में से एक है, जो मुख्य रूप से साइबेरिया और मुरमंस्क क्षेत्रों में स्थित हैं. रोसनेफ्ट ने पिछले वर्ष साइबेरिया के टॉमटोर क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण रेयर अर्थ भंडार का अधिग्रहण किया था.

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर भी फोकस

हाल ही में रूस की Giredmet और भारत की Nexon Geochem के बीच रेयर अर्थ प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी के रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिए समझौता हुआ है. इसके अलावा Giredmet और TEXMiN के बीच भी नियोडिमियमआयरनबोरोन मैग्नेट तकनीक के संयुक्त विकास को लेकर सहयोग शुरू किया गया है. इससे भारत को भविष्य में रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है.

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