यूपी के कानपुर जिले का लाल इमली मिल का ऐतिहासिक क्लॉक टावर इन दिनों रहस्यमयी तरीके से घड़ियों की सुइयां गायब होने के कारण चर्चा में है. 105 वर्ष पुराने इस क्लॉक टावर की तीन घड़ियों से सुइयां गायब होने के बाद मिल प्रबंधन और पुलिस दोनों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं. खास बात यह है कि जिस टावर से सुइयां गायब हुई हैं, उसकी ऊंचाई करीब 128 फीट है और वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल माना जाता है. अब सवाल यह उठता है कि इतनी ऊंचाई वाले टावर से चोरी कैसे हुई.

मिल प्रबंधन के अनुसार 5 जून को सबसे पहले एक घड़ी की सुइयां गायब मिली थीं. उस समय इसे आंधीतूफान का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया गया, लेकिन 18 जून को दो अन्य घड़ियों की सुइयां भी गायब हो गईं. इसके बाद चोरी की आशंका गहराने पर मिल प्रबंधक सुनील कुमार मिश्र ने कर्नलगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई.
कैसे होगी जांच? नहीं मिली टावर की चाबी
मामले की जांच के लिए पुलिस टीम लाल इमली परिसर पहुंची और सुरक्षा कर्मियों व कर्मचारियों से पूछताछ की. जांच के दौरान एक बड़ी समस्या सामने आई कि जिस क्लॉक टावर की जांच की जानी है, उसकी छत तक जाने वाली सीढ़ियों का दरवाजा पिछले 6 वर्षों से बंद पड़ा है और उसकी चाबी भी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में पुलिस अभी तक टावर के शीर्ष तक नहीं पहुंच सकी है. अब चाबी नहीं मिलने की स्थिति में ताला तोड़कर जांच आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.
कानपुर की पहचान हैं ये घड़ियां
बताया जा रहा है कि साल 1911 से 1921 के बीच बने इस ऐतिहासिक घंटाघर की घड़ियां कभी कानपुर की पहचान मानी जाती थीं. पहले एक विशेष टीम नियमित रूप से टावर पर जाकर घड़ियों के यांत्रिक तंत्र में चाबी भरती थी, जिससे चारों घड़ियां लगातार चलती थीं, लेकिन 2013 में मिल बंद होने और कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद यह व्यवस्था भी समाप्त हो गई.
मंत्रालय ने तलब की रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक मामले को गंभीरता से लेते हुए वस्त्र मंत्रालय ने भी रिपोर्ट तलब की है. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सुइयां वास्तव में चोरी हुई हैं या फिर किसी अन्य कारण से गायब हुई हैं. ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ा यह रहस्य अब कानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है.


