महाराष्ट्र में मराठी को लेकर शुरू हुआ विवाद थम नहीं रहा. राज्य सरकार ने ऑटोटैक्सी चालकों को मराठी सीखना अनिवार्य कर दिया है. नियम न मानने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. पूरे राज्य में मराठी भाषा को लेकर जांच अभियान शुरू किया गया है. 1268 चालकों को नोटिस दिया गया और उन्हें भाषा सीखने के लिए 1 महीने का मौका दिया गया है. चालकों को रोकरोककर मराठी भाषा का ज्ञान चेक किया जा रहा है. भाषा के विवाद के बीच जानिए महाराष्ट्र में कितने लोग मराठी बोलते हैं.

महाराष्ट्र में कितने लोग मराठी बोलते हैं… जनगणना 2011 के आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र में 6.24 करोड़ लोग मराठी बोलते हैं. मुंबई और पुणे वो शहर है जहां मराठी बोलने वाले महाराष्ट्र के दूसरे शहरों के मुकाबले कम हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन दोनों में एक बड़ी आबादी दूसरे राज्यों की है जो नौकरी करने या दूसरे कारणों से यहां ठहरी और इसका हिस्सा बनी.
मराठी ऐसे बनी आधिकारिक भाषा…देश आजाद होने के बाद भारत में राज्यों के पुनर्गठन की मांग तेज हुई. मराठी बोलने वाले अपने लिए एक नए राज्य की मांग कर रहे थे. इसके लिए 1950 में संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन हुआ. मराठी भाषी एकजुट हुए और 1 मई 1960 को महाराष्ट्र की स्थापना हुई और मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाया गया. इसके साथ मराठी को राज्य की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला.
मराठी के लिए आवाज उठाई… 1960 में मराठी महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनी और पहचान के रूप में स्थापित हुई. महाराष्ट्र के गठन के बाद प्रशासनिक कामकाज, न्यायपालिका और शिक्षा में मराठी भाषा को बढ़ावा दिया जाने लगा. यही नहीं, समयसमय पर इसके संरक्षण के लिए राजनीतिक और सामाजिक दलों ने आवाज उठाई.
मराठी भाषा के संरक्षण और विस्तार को लेकर कई ऐसी नीतियां अपनाई गईं जिससे विवाद पैदा हुआ. महाराष्ट्र में मराठी न बोलने पर गैरमराठी भाषाई लोगों को परेशान किया गया. मामला हाथापाई तक पहुंचा. हालिया विवाद भी विरोध की वजह बन रहा है. टैक्सी और ऑटो चालकों का बड़ा समूह इसको लेकर हड़ताल करने की तैयारी में है.



