
रोहतक में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की मर्सी चांस परीक्षाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक छात्र संगठन ने दावा किया है कि परीक्षा से पहले कथित तौर पर 20 से 25 हजार रुपये में प्रश्नपत्र और उसका समाधान उपलब्ध कराने की बात कही जा रही थी। इस दावे के समर्थन में WhatsApp चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने रखे जाने की बात कही गई है।
मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र की गोपनीयता और परीक्षा केंद्रों पर निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अभी तक कथित चैट और ऑडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
WhatsApp चैट में पेपर के समाधान के लिए पैसे मांगने का दावा
सामने आई कथित WhatsApp चैट को लेकर दावा किया जा रहा है कि परीक्षा में मदद के नाम पर विद्यार्थियों को एक ग्रुप से जोड़ने और प्रश्नपत्र का समाधान उपलब्ध कराने की बात कही गई। कथित बातचीत में पूरा समाधान उपलब्ध कराने के बदले भुगतान की बात होने का दावा है।
इतना ही नहीं, चैट में परीक्षा के दौरान उत्तर पुस्तिका खाली नहीं छोड़ने जैसी हिदायत दिए जाने की बात भी सामने आई है। यदि ये दावे जांच में सही साबित होते हैं तो यह परीक्षा की निष्पक्षता और प्रश्नपत्र की गोपनीयता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
रोल नंबर और परीक्षा केंद्र की जानकारी मांगने का दावा
कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी कई गंभीर दावे किए गए हैं। बताया जा रहा है कि एक छात्र की ओर से गणित के पेपर को लेकर जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में कथित तौर पर रोल नंबर और परीक्षा केंद्र से जुड़ी जानकारी मांगी गई।
इसके बाद परीक्षा के दौरान ही हल किया हुआ पेपर उपलब्ध कराने का भरोसा दिए जाने की बात कही जा रही है। इस दावे ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फ्लाइंग स्क्वायड और सुपरवाइजर तक की भूमिका का आरोप
छात्र संगठन के पदाधिकारी की ओर से आरोप लगाया गया है कि कथित ऑडियो में परीक्षा व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग स्तर के लोगों की संभावित भूमिका की बात सामने आती है। इनमें फ्लाइंग स्क्वायड, परीक्षा नियंत्रक विभाग के कर्मचारियों और परीक्षा केंद्र के सुपरवाइजर तक का जिक्र होने का दावा किया गया है।
हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कथित रिकॉर्डिंग वास्तविक है या नहीं और उसमें कही गई बातें सही हैं या नहीं, यह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
विश्वविद्यालय ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने पेपर बिक्री और लीक से जुड़े आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और फिलहाल पेपर लीक या प्रश्नपत्र बेचने से संबंधित कोई शिकायत विश्वविद्यालय को नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ठोस साक्ष्य या लिखित शिकायत के साथ सामने आता है तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित परीक्षा केंद्र को रद्द करने समेत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
मर्सी चांस परीक्षा में विद्यार्थियों को मिलता है अंतिम अवसर
विश्वविद्यालय में मर्सी चांस परीक्षाएं पुराने लंबित मामलों वाले विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पूरी करने का अवसर देने के लिए आयोजित की जा रही हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के कथित दावे ने उन विद्यार्थियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है, जो नियमों के तहत परीक्षा देकर अपनी डिग्री पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।
अगर प्रश्नपत्र की गोपनीयता से जुड़ी कोई गड़बड़ी साबित होती है तो इसका असर केवल कुछ विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
अब कथित चैट और ऑडियो की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि सामने लाई गई WhatsApp चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग कितनी वास्तविक हैं और उनमें किए गए दावों में कितनी सच्चाई है। तकनीकी जांच के जरिए रिकॉर्डिंग और चैट की सत्यता सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय हो सकेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी साक्ष्य मिलने पर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। ऐसे में अब मामला कथित चैट, ऑडियो और सामने आने वाले अन्य साक्ष्यों की जांच पर टिका हुआ है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो परीक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका की भी विस्तृत जांच हो सकती है।



