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नई टैक्स व्यवस्था में जजों की कर छूट पर उठे सवाल; जस्टिस संदीप जैन पहुंचे कोर्ट, केंद्र और CBDT को नोटिस

Allahabad High Court Notice To CBDT: नई आयकर व्यवस्था में न्यायिक भत्तों पर कर छूट नहीं मिलने के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।

नई टैक्स व्यवस्था में जजों की कर छूट पर उठे सवाल; जस्टिस संदीप जैन पहुंचे कोर्ट, केंद्र और CBDT को नोटिस
नई टैक्स व्यवस्था में जजों की कर छूट पर उठे सवाल; जस्टिस संदीप जैन पहुंचे कोर्ट, केंद्र और CBDT को नोटिस

न्यायमूर्ति संदीप जैन की याचिका

याचिका के अनुसार न्यायमूर्ति संदीप जैन ने नई कर व्यवस्था अपनाने के बाद अपनी कुल आय में शामिल न्यायिक भत्तों पर आयकर छूट का दावा किया था। उनका कहना है कि हाईकोर्ट जज अधिनियम, 1954 की धारा 22डी के तहत न्यायिक भत्तों को आयकर से छूट प्राप्त है। इस प्रावधान के अंतर्गत न्यायाधीशों को आधिकारिक आवास, आवागमन सुविधाएं, सत्कार भत्ता तथा अवकाश यात्रा रियायत जैसी सुविधाओं पर कर राहत मिलती रही है।

न्यायिक भत्तों पर छूट का दावा किया, लेकिन आयकर पोर्टल ने अनुमति नहीं

याचिका में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 202526 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करते समय न्यायमूर्ति जैन ने लगभग 9.85 लाख रुपये के न्यायिक भत्तों पर छूट का दावा किया, लेकिन आयकर पोर्टल ने इसकी अनुमति नहीं दी। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि यह लाभ केवल पुरानी कर व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध माना जा रहा है।

सीबीडीटी और केंद्रीय वित्त मंत्रालय को दिया नोटिस

इस संबंध में न्यायमूर्ति जैन ने सीबीडीटी और के समक्ष भी प्रतिवेदन दिया था। जवाब में उन्हें 12 सितंबर 2025 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए बताया गया कि नई कर व्यवस्था चुनने वाले करदाता ऐसी छूटों का दावा नहीं कर सकते। सरकार का तर्क है कि नई कर व्यवस्था पहले से ही कम कर दरों, उदार टैक्स स्लैब और अधिक रिबेट जैसी सुविधाएं प्रदान करती है, इसलिए अतिरिक्त छूट देना दोहरा लाभ होगा।

मामला अब न्यायपालिका से जुड़े विशेष भत्तों और नई के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बन गया है। हाईकोर्ट के समक्ष यह तय होना है कि विशेष कानूनों के तहत मिलने वाली न्यायिक छूटें नई कर व्यवस्था में भी लागू रहेंगी या नहीं। इस फैसले का असर भविष्य में अन्य न्यायाधीशों और समान श्रेणी के लाभार्थियों पर भी पड़ सकता है।

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