
Agra Murder Case: उत्तर प्रदेश के आगरा में पांच साल पुराने चर्चित जूता फैक्ट्री संचालक नरेश कुमार हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी और प्रेमी के भाई को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत में सबसे अहम भूमिका मृतक की नाबालिग बेटी की गवाही ने निभाई, जिसने उस रात की कई अहम बातें बताईं।
बेटी की गवाही से खुली हत्या की परतें
अभियोजन के अनुसार, हत्या के समय बेटी की उम्र करीब 10 वर्ष थी। उसने अदालत को बताया कि घटना वाली रात उसकी मां ने तीनों बच्चों को एक कमरे में बंद कर बाहर से कुंडी लगा दी थी। बच्चों को पहले कोल्ड ड्रिंक दी गई और टीवी की आवाज तेज कर दी गई।
बेटी ने बताया कि रात करीब तीन बजे उसने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला गया। जब दरवाजा खुला तो कमरे के बिस्तर पर खून के निशान दिखाई दिए। उसने यह भी बताया कि उसकी मां रात में नहाई थी। जब उसने इसकी वजह पूछी तो उसे डांटकर चुप करा दिया गया।
अवैध संबंध के विरोध के बाद बढ़ा विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि नरेश कुमार की पत्नी की पहचान एक राजनीतिक दल के कार्यक्रमों के दौरान रविकांत राजपूत से हुई थी। लगातार मुलाकातों के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। अभियोजन के मुताबिक, जब नरेश कुमार को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया, जिसके बाद दंपति के बीच विवाद बढ़ने लगा।
रात में की गई हत्या
जांच एजेंसियों के अनुसार, घटना वाले दिन पहले से योजना बनाई गई थी। आरोप है कि देर रात पत्नी ने कथित प्रेमी को घर बुलाया और बच्चों को अलग कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद सो रहे नरेश कुमार पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में शव को बोरे में भरकर खाली प्लॉट में फेंकने का प्रयास किया गया।
घटनास्थल से मिले अहम सबूत
पुलिस को कमरे की दीवारों और फर्श पर खून के धब्बे मिले। मौके से खून से सनी ईंट, शराब की बोतल और कुछ दूरी पर एक बोरा बरामद हुआ। बोरे के भीतर बेडशीट, तकिया, दस्ताने और खून से सने कपड़े मिले, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।
अदालत ने सुनाई उम्रकैद
इस मामले में मृतक की बेटी सहित कुल दस गवाहों की गवाही अदालत में पेश की गई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने पत्नी, उसके कथित प्रेमी और प्रेमी के भाई को दोषी करार देते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर आर्थिक दंड भी लगाया गया।
यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि वर्षों बाद भी मजबूत जांच और प्रत्यक्ष गवाहों की गवाही के आधार पर गंभीर अपराधों में न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।



