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उद्धव ठाकरे के बचाव में उतरे राज ठाकरे, बोले- ‘जनप्रतिनिधियों को तोड़ने और विधायकों को अगवा करने की कोशिशें जारी…

उद्धव ठाकरे के बचाव में उतरे राज ठाकरे, बोले- ‘जनप्रतिनिधियों को तोड़ने और विधायकों को अगवा करने की कोशिशें जारी…

महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचलें जारी हैं, जहां शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की बगावत और बढ़ती टकराव की खबरें सामने आई हैं। इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं सत्ता की होड़ में जनता के मूल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।

राज ठाकरे ने शनिवार को मुंबई में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश और महाराष्ट्र में सांसदों को तोड़ने और विधायकों का अपहरण करने जैसी कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “जब स्वाभिमान खत्म हो जाता है, तो सिर्फ जिंदा लाशें ही बचती हैं।” उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि सत्ता के लालच में राजनीतिक दल बड़े और अहम मुद्दों को भूल रहे हैं। ठाकरे ने कहा, “हम अपनी परंपरा, इतिहास और राष्ट्र की परंपरा को भूल रहे हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोधियों को कमजोर करने के लिए राजनीतिक दल जनसमर्थन के बजाय साजिशें रच रहे हैं। अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हमारा आंदोलन घरों तक तो पहुंचता है, लेकिन बैलट बॉक्स तक नहीं। क्या हमें इस बात का एहसास भी है कि हमारे चारों ओर कोई साजिश रची जा रही है?”

वहीं, यह बयान उस समय आया है जब कुछ ही दिन पहले उद्धव ठाकरे ने अपने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह में अपने रुख को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि चुनौतियों के बावजूद वह पार्टी के नेतृत्व पर भरोसा बनाए रखेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि पार्टी के कार्यकर्ता उनका भरोसा खो देंगे तो वह पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा था, “मुझे खुशी होगी अगर कोई और पार्टी का नेतृत्व संभाले, लेकिन मैं इस पार्टी को चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा।”

शिवसेना (UBT) में इन घटनाक्रमों का कारण पार्टी के नौ सांसदों में से छह का बगावत है। इन सांसदों ने पार्टी व्हिप के बावजूद नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया। इनमें नागेश आष्टीकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। वहीं, पार्टी के वफादार नेताओं में राज्यसभा सांसद संजय राउत, अरविंद सावंत, अनिल देसाई और वाजे भी मौजूद थे, जिन्हें बाद में पार्टी के स्थापना दिवस पर सम्मानित किया गया।

पार्टी ने इन बगावती सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस बगावत ने शिवसेना के अंदर फिर से विभाजन की अटकलों को तेज कर दिया है, विशेषकर 2022 में एकनाथ शिंदे के विद्रोह और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की घटना के बाद।

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