जालंधर अनुसूचित जाति एकता सशक्तीकरण मंच की ओर से मंगलवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जालंधर में सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य अनुसूचित जाति समाज के आर्थिक सशक्तीकरण, उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इसमें समाज के गणमान्य व्यक्तियों, चिंतकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में पंजाब अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन सरदार जसबीर सिंह गढ़ी तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य डॉ. पार्थ विश्वास प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सरदार जसबीर सिंह गढ़ी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को समझने के लिए उनके मूल साहित्य का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंबेडकर के बारे में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी गई बातों पर विश्वास करने के बजाय उनके स्वयं के लेखन को पढ़कर विचारों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर केवल किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि पूरे समाज के नायक हैं। गढ़ी ने अंबेडकर की पुस्तकों ‘हू वर द शूद्राज’, ‘हू वर द अनटचेबल्स’ तथा ‘ओरिजनल राइटिंग्स एंड स्पीचेज’ का उल्लेख करते हुए उनके विचारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य डॉ. पार्थ विश्वास ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचारों पर आधारित भारत के निर्माण के लिए अनुसूचित जाति समाज के युवाओं और उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को समय की आवश्यकता बताया। प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. कृष्ण गोपाल ने सामाजिक समानता और समरसता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की मूल विचारधारा में जातपात के लिए कोई स्थान नहीं है। भारतीय दर्शन दुनिया को प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देता है।
समाजसेवी प्रदीप जोशी ने कहा कि सद्गुरु श्री रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के अवसर पर उनके समरसता के संदेश को प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय, गांव और गली तक पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए।
पद्मश्री एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पूर्व लोकसभा सांसद हंसराज हंस ने कहा कि समानता और समरसता का संदेश हमारे ग्रंथों और गुरुओं की वाणी में भी मिलता है, लेकिन इसे संवैधानिक रूप से लागू कराने का महत्वपूर्ण कार्य डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर ने किया। उन्होंने इस अवसर पर देशभक्ति गीत भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।



