
उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी में बगावत क्यों हुई, इसके बारे में पहली बार बागी सांसदों ने बात की है. नागेश अष्टीकर ने यूबीटी की इस हाल के लिए शिवसेना नेता संजय राउत को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने ये भी कहा कि उद्धव ठाकरे के लिए और मातोश्री के लिए उनके मन में कोई नाराजगी नहीं है. लेकिन उनकी (संजय राउत की) बातें बहुत ज्यादा हो गईं… हमने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि हम पर भरोसा नहीं किया गया.
निंबालकर भी आए मीडिया के सामने
इससे पहले शिवसेना से अलग हुए सांसदों में से केवल धराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ही मीडिया के सामने आए थे. उन्होंने भी इशारों इशारों में यही बात कही थी. साफ कहा था कि उद्धव ठाकरे और मातोश्री के खिलाफ वे कुछ नहीं बोल सकते. लेकिन उनका इशारा साफ था कि उनकी बातें नहीं सुनी जा रही थीं.
कहां थे सारे सांसद
महाराष्ट्र में सवाल बना हुआ था कि बाकी पांच सांसदों की क्या भूमिका थी और वे आखिर कहां थे. अब इस सवाल का जवाब मिल गया है और हिंगोली के बागी सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर विद्रोह के पीछे की वजह बताई है. उन्होंने कहा, उद्धव ठाकरे के प्रति मेरे मन में कोई द्वेष नहीं है और यह फैसला सिर्फ इसलिए भी लिया गया, क्योंकि हम अपने इलाके में डेवलपमेंट नहीं कर पा रहे थे. जहां तक 18 तारीख को दिल्ली जाने की बात है, तो हममें से कोई कहीं नहीं गया था. लेकिन जिस तरह का अविश्वास और अत्यधिक चर्चा हुई, उससे कई लोगों को लगा कि यहीं रुकने का कोई फायदा नहीं है.
तो फिर विलेन कौन?
संजय राउत पर निशाना साधते हुए आष्टीकर ने कहा, राऊत साहब ने कहा था कि झाड़कर रख देंगे. वे बड़े हैं, मेरे पिता के समान हैं. वे कुछ भी कहें, चलता है. लेकिन किसी को पीटने या तोड़ने वाले भी कम नहीं होते. इंसान हर बात को सोच-समझकर ही कदम उठाता है. हो सकता है कि अनजाने में किसी ने उनकी बात सुनकर कुछ करने की कोशिश की हो. कभी-कभी, जब कोई सतर्क न हो, तो कोई घटना घट सकती है. लेकिन उसके क्या परिणाम हो सकते हैं, यह आपको भी पता है.
जनता का काम कैसे करेंगे
सांसद आष्टीकर ने कहा, बिजली के बिना मजदूर कोई काम नहीं कर सकते. शायद यही वजह है कि मैंने ये कदम उठाए हैं. मेरे निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य करने ही होंगे. जनता ने मुझे बड़ी उम्मीदों के साथ चुना है. हमें किसी भी तरह का फंड नहीं मिल रहा था. जनता की उम्मीदें बहुत ऊंची हैं, तो हम उनका काम कैसे कर सकते हैं, फंड कहां से लाएंगे? बिजली के बिना काम मुमकिन नहीं था, इसलिए हमने विद्रोह का कदम उठाया.
‘संजय राउत मेरे पिता समान’
आष्टिकर ने कहा कि काम की कमी के कारण कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा था और कई लोग पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे थे, इसलिए सत्ता में आने के बाद उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए यह कदम उठाया. संजय राउत के बारे में उन्होंने कहा, राउत मेरे लिए पिता समान हैं. वे चाहें कुछ भी कहें, मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं है. मैनें अपने कार्यकर्ताओं और नागरिकों से भी अनुरोध किया है उनके खिलाफ असंवैधानिक भाषा का प्रयोग न करें.



