वरुथिनी एकादशी व्रत कथा 2026 (Varuthini Ekadashin Vrat Katha 2026 In Hindi)

कहा जाता है कि राजा मांधाता एक न्यायप्रिय और सत्यवादी शासक थे, जिनके राज्य में चारों ओर सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण था। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपनी प्रजा का पालन करते थे। एक समय की बात है, राजा मांधाता वन में जाकर कठोर तपस्या कर रहे थे। वे गहन ध्यान में लीन थे, तभी अचानक एक जंगली भालू (कुछ कथाओं में सिंह) ने उन पर हमला कर दिया। उस हिंसक पशु ने राजा को गंभीर रूप से घायल कर दिया और उनका एक पैर तक चबा डाला। अत्यधिक पीड़ा में होने के बावजूद भी राजा का मन भगवान विष्णु की भक्ति से विचलित नहीं हुआ और वे निरंतर उनका स्मरण करते रहे।

राजा की अटूट भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने राजा को उस संकट से बचाया। भगवान ने राजा से कहा कि यह कष्ट उनके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है, लेकिन यदि वे विधिपूर्वक वरुथिनी एकादशी का व्रत करें, तो उन्हें इस पाप से मुक्ति मिल सकती है। भगवान के आदेश का पालन करते हुए राजा मांधाता ने पूर्ण श्रद्धा, नियम और विधि के साथ वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा।

इस व्रत के प्रभाव से राजा मांधाता का शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया और उनका खोया हुआ पैर भी वापस प्राप्त हो गया। साथ ही उनके सभी पाप नष्ट हो गए और उन्हें पुनः सुख, वैभव और यश की प्राप्ति हुई। इस प्रकार वरुथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी माना गया है।

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