सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने बुधवार को RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले के इस रुख का समर्थन किया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की इच्छा रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती से आपसी रिश्ते बेहतर हो सकते हैं. नरवणे ने एक कार्यक्रम में कहा कि सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं, जिनकी आम समस्याएं ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ से जुड़ी हैं. आम आदमी का राजनीति से कोई लेनादेना नहीं होता. जब दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती होगी, तो दोनों देशों के बीच भी दोस्ती होगी.

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि ये सही कदम है. लोगों के बीच आपसी संपर्क जरूरी है. नरवणे की यह टिप्पणी संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद RSS में दूसरे सबसे बड़े नेता होसबले के बयान के एक दिन बाद आई है. आरएसएस नेता होसबोले ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए. अगर पाकिस्तान सुई की नोक की तरह चुभकर पुलवामा जैसी घटनाएं करने की कोशिश करता है, तो हमें हालात के हिसाब से उचित जवाब देना होगा. हमें बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए. हमें हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए.
STORY | Exarmy chief Naravane backs RSS leader’s remarks on dialogue with Pakistan
Former army chief Gen Manoj Naravane supported RSS leader Dattatreya Hosabale’s stand on the desirability of willingness to have a dialogue with Pakistan, stating that friendship between pic.twitter.com/KD0MjlPdpz
— Press Trust of India May 13, 2026
उन्होंने कहा कि लोगों के बीच आपसी संबंध भारतपाकिस्तान के तनाव को कम कर सकते हैं, क्योंकि हमारे सांस्कृतिक जुड़ाव हैं और हम कभी एक ही देश थे. उन्होंने बताया कि मेरा पक्का मानना है कि सिविल सोसाइटी के आपसी संपर्क आखिरकार पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने में मदद करेंगे. अब इस दिशा में और ज्यादा कोशिशें की जानी चाहिए. होसबले ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों से भी शांति के लिए ‘आगे आने’ की अपील की और कहा कि पड़ोसी देश की सेना पर भरोसा नहीं किया जा सकता. RSS, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक मार्गदर्शक है. नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख के तौर पर काम किया, फरवरी में तब सुर्खियों में आए थे, जब उनकी अभी तक प्रकाशित न हुई आत्मकथा के एक अध्याय के कुछ अंशों का हवाला देते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतचीन लद्दाख संकट के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था.



