
साइबेरिया: रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक रिसर्च लैब में हुए हादसे के बाद किसी खतरनाक संक्रमण के फैलने की चर्चा तेज हो गई। टेस्ट ट्यूब टूटने की घटना में एक लैब टेक्नीशियन की मौत की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैलने लगा कि कहीं प्लेग या कोरोना वायरस तो नहीं फैल गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
रिसर्च लैब में क्या हुआ?
बताया गया कि साइबेरिया की एक रिसर्च लैब में काम के दौरान टेस्ट ट्यूब टूट गई। इसके बाद लैब में मौजूद एक रसायन के संपर्क में आने से एक टेक्नीशियन की मौत हो गई।
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे और सोशल मीडिया पर इसे किसी संक्रामक बीमारी से जोड़कर कई दावे किए जाने लगे। कुछ पोस्ट में इसे प्लेग से जोड़ा गया, जबकि कुछ लोगों ने कोरोना वायरस के दोबारा फैलने की आशंका जताई।
क्या साइबेरिया में प्लेग फैल गया?
लैब में हुई घटना को सीधे तौर पर प्लेग या कोरोना वायरस के नए प्रकोप का प्रमाण मानना सही नहीं है। किसी व्यक्ति की मौत या लैब में हुई दुर्घटना से यह साबित नहीं होता कि कोई संक्रामक बीमारी आबादी में फैल रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की ओर से भी किसी नए वैश्विक महामारी जैसे हालात की पुष्टि को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी संक्रमण के प्रकोप की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच, टेस्टिंग और आधिकारिक स्वास्थ्य निगरानी जरूरी होती है।
कोरोना वायरस की फिर से एंट्री का दावा कितना सही?
सिर्फ साइबेरिया की लैब में हुई घटना के आधार पर कोरोना वायरस के दोबारा फैलने का दावा करना सही नहीं होगा। कोरोना वायरस और उसके अलग-अलग वैरिएंट दुनिया में पहले भी मौजूद रहे हैं, लेकिन किसी खास जगह पर नया प्रकोप होने की पुष्टि आधिकारिक स्वास्थ्य आंकड़ों से ही की जा सकती है।
इसी तरह प्लेग भी एक वास्तविक संक्रामक बीमारी है, लेकिन लैब दुर्घटना को सीधे प्लेग के फैलने से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।



