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​Screenshot लेने की आदत कम कर रही याददाश्त? जानें क्या कहती है स्टडी

मोबाईल फोन का यूज आज न सिर्फ एंटरटेनमेंट करना है, बल्कि डेली रूटीन में ये एक बेहद काम की चीज बन चुका है. खबरों से अपडेट रहने से लेकर किसी लेक्चर तक को कन्ज्यूम करने तक में फोन का इस्तेमाल किया जाता है. स्क्रीन स्क्रॉल करने के दौरान किसी भी काम की चीज का स्क्रीनशॉट लेकर रख लेना आज एक आदत बन चुकी है. इससे हमारा दिमाग उस चीज को याद रखने के लिए कम मेहनत करता है, क्योंकि हमें लगता है कि फोन में तो सेव कर ही लिया है.

​Screenshot लेने की आदत कम कर रही याददाश्त? जानें क्या कहती है स्टडी

आप भी अगर उन लोगों में से हैं जो बारबार हर चीज का स्क्रीनशॉट लेते हैं तो इससे आपकी याददाश्त पर असर पड़ सकता है. आपने अब तक सुना होगा कि इंसान किसी भी चीज को इमेजेस में याद करता है, लेकिन आज के समय में हम अपना फोकस इस बात पर करते हैं कि बाद के लिए कुछ भी याद करना हो तो स्क्रीनशॉट लेकर रख लिया.

स्क्रीनशॉट लेने की आदत पर स्टडी

अमेरिका की बिंगहैमडन यूनिवर्सिटी द्वारा स्क्रीनशॉट लेने की आदत पर एक अध्ययन किया गया है. इसमें 17 से लेकर 27 साल तक के 900 युवाओं को शामिल किया गया जो अंडर ग्रेजुएट थे. इस स्टडी में सात अलगअलग प्रयोग किए गए हैं.

आज लोग न सिर्फ याद रखने के लिए स्क्रीनशॉट लेते हैं, बल्कि पढ़ाई के दौरान ब्लैकबोर्ड पर लिखी चीजों तक को खुद लिखने की बजाय फोटो कैप्चर करते हैं या लेक्चर तक को रिकॉर्ड कर लिया जाता है. इसको लेकर ही ये देखा गया कि क्या इससे याददाश्त पर कुछ असर होता है.

युवाओं पर किया गया ये परीक्षण

इस अध्ययन में पूरे सात प्रयोगों की एक सीरीज थी. जिसमें युवाओं पर किए गए परीक्षण के दौरान उन्हें फोन पर कला की कुछ तस्वीरों को दिखाया गया. इनमें से कुछ को कहा गया कि वो इसका स्क्रीनशॉट ले लें, जबकि कुछ को सिर्फ तस्वीरें देखने का निर्देश दिया गया. प्रतिभागियों ने तस्वीरें भी कैप्चर कीं. इसमें से कुछ छात्रों को परीक्षण के बारे में पता भी नहीं था. इसके बाद उनका ध्यान मांडला कला को रंगने कहा गया. इसके अलावा कुछ प्रयोगों में परीक्षण करने के लिए गणित के सवालों को भी शामिल किया गया. इसके बाद ये जांचा गया कि चीजें किसमें कितनी अच्छी तरीके से याद रहीं.

क्या होता है याददाश्त पर असर?

इस अध्ययन में पाया गया कि स्क्रीनशॉट या तस्वीरें कैप्चर करने वाले छात्रों ने सिर्फ तस्वीरें देखने वाले छात्रों की तुलना में कम याद रखा. प्रतिभागी ये भी पहचानने में पूरी तरह से श्योर नहीं थे कि उन्होंने किन कलाकृतियों का स्क्रीनशॉट लिया था और किनको सिर्फ देखा था. इस अध्ययन की सह लेखिका डीन वेस्टरमैन ने कहा कि इसके अलावा हमने पाया प्रतिभागियों को यह सहीसही पहचानने में भी कठिनाई हो रही थी कि उनके डिवाइस पर किन कलाकृतियों के स्क्रीनशॉट हैं. इसे ये भी जानकारी सामने आई कि लोगों के फोन में ऐसे स्क्रीनशॉट भी सेव हैं जिन्हें लेने की उन्हें याद भी नहीं है.”

दरअसल इस स्टडी के निष्कर्ष ये नहीं कहते हैं कि स्क्रीनशॉट लेने से याददाश्त कमजोर होने लगती है या हमेशा ही ये आपकी याददाश्त के लिए नुकसानदायक है. दरअसल जब हम फोन में कोई जानकारी सेव कर लेते हैं तो उसे याद करने में अपनी संज्ञानात्मक शक्ति का यूज कम करते हैं. इस सुविधा का यही नुकसान है. फोन में जो तस्वीरें या स्क्रीनशॉट लिए हैं और आप बारबार उसे देखते हैं तो लंबे समय तक याद रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन असल में समस्या ये है कि लोग जितने स्क्रीनशॉट लेते हैं उतने को दोबारा देखने की जरूरत भी नहीं होती है.

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