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SEBI का पंप-एंड-डंप ऑपरेशन, 221 यूनिट को 7 साल के लिए बाजार से किया बैन, 10 करोड़ का लगा जुर्माना

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने पंपएंडडंप ऑपरेशन यानी प्रतिभूति धोखाधड़ी मामले में 221 इकाइयों पर सात साल तक के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. साथ ही व्यक्तिगत निवेशक हनीफ शेख पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. सेबी ने बुधवार को यह जानकारी दी.

SEBI का पंप-एंड-डंप ऑपरेशन, 221 यूनिट को 7 साल के लिए बाजार से किया बैन, 10 करोड़ का लगा जुर्माना

पंपएंडडंप ऑपरेशन प्रतिभूति धोखाधड़ी का एक रूप है. धोखाधड़ी करने वाले पहले किसी छोटी या कम कारोबार वाली कंपनी के शेयर खरीदते हैं, सोशल मीडिया या थोक संदेशों के माध्यम से झूठी अफवाहें फैलाकर शेयर की कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाते हैं और फिर शेयरों को उच्च कीमतों पर बेच देते हैं. इससे खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान होता है.

पंपएंडडंप से जुड़ा है मामला

सेबी ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा कि मॉरिया उद्योग लिमिटेड, 7एनआर रिटेल, दार्जिलिंग रोपवे कंपनी, जीबीएल इंडस्ट्रीज और विशाल फैब्रिक्स लिमिटेड के शेयरों में शेख और उसकी सहयोगी कंपनियों ने हेरफेर किया है. शेख इस मामले का कथित मुख्य साजिशकर्ता है. यह मामला 2017 से 2020 के बीच पांच शेयरों में बड़े पैमाने पर पंपएंडडंप से जुड़ा है. सेबी ने 394 पृष्ठों के अंतिम आदेश में कहा कि हनीफ शेख ने एक सुनियोजित धोखाधड़ी साजिश रची, जिसमें 200 से अधिक आपस में जुड़े हुए संस्थान शामिल थे. इन्हें पीवी इन्फ्लुएंसर, कोलैबोरेटर और ऑफलोडर जैसी भूमिकाएं दी गई थीं, ताकि अवैध लाभ को विभिन्न माध्यमों से घुमाकर शेख या उसके नियंत्रण वाली कंपनियों तक पहुंचाया जा सके.

ऐसे होती थी हेराफेरी

सेबी के अनुसार, इन इकाइयों ने समन्वित लेनदेन के जरिए शेयरों की कीमत और बाजार भाव को कृत्रिम रूप से बढ़ाया और बाद में ऊंचे दाम पर शेयर बेचकर निवेशकों को फंसाया. सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने आदेश में कहा कि यह साजिश सुनियोजित, व्यापक और औद्योगिक स्तर पर संचालित थी, जिससे बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ. नियामक के अनुसार, इस घोटाले से करीब 143.79 करोड़ रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया गया. सेबी ने हनीफ शेख को सात वर्षों के लिए बाजार से प्रतिबंधित किया और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. वहीं, उनसे जुड़ी पांच इकाइयों को छह वर्षों के लिए प्रतिबंध करते हुए उन पर दोदो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. सेबी ने सभी दोषियों से 143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वसूलने का भी आदेश दिया है.

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