
सूरत: गुजरात के सूरत जिले से सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड में बीमारी और कोरोना के नाम पर हुई मौतों के पीछे छिपे राज की परतें खुलने का दावा किया गया है। पुलिस जांच के मुताबिक, परिवार के तीन सदस्यों की मौत को बीमारी से जोड़कर पेश किया गया था। मामले में आरोपी पति-पत्नी पर हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप हैं। करीब चार साल बाद जांच के दौरान श्मशान घाट से एक मानव कंकाल बरामद किया गया, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।
इस मामले का खुलासा तब आगे बढ़ा, जब आरोपी माधवदास साधु का अपनी पत्नी उर्मिला से विवाद हो गया। इसके बाद वह खुद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पहुंचा और अपनी नानी-सास शांताबेन की हत्या के संबंध में शिकायत करने लगा। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच और पूछताछ की तो शक की सुई उसी की ओर घूम गई। जांच में परिवार के तीन सदस्यों की मौत को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।
टीबी के इलाज के खर्च को बताया गया हत्या की वजह
पुलिस के अनुसार, माधवदास पर अपनी भाभी भारती वसावा की हत्या का आरोप है। बताया गया कि भारती टीबी से पीड़ित थीं और उनके इलाज के खर्च को लेकर आरोपी परेशान था। आरोप है कि उसने अपनी दूसरी पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर भारती की गला घोंटकर हत्या कर दी।
जांच के मुताबिक, शव को छिपाने के लिए उसे सूरत जिले के कोसंबा क्षेत्र में सावा गांव के पास स्थित श्मशान घाट में दफना दिया गया। मामले में सामने आए इन आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए की जानी है।
श्मशान में खुदाई के दौरान मिला मानव कंकाल
मामले की जांच आगे बढ़ने पर सूरत ग्रामीण पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम आरोपी को साथ लेकर श्मशान घाट पहुंची। वहां खुदाई की गई, जिसके दौरान करीब आठ फीट नीचे से मानव कंकाल बरामद होने की जानकारी सामने आई।
फॉरेंसिक टीम ने अवशेषों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया। वैज्ञानिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अवशेष किसके हैं और उनकी पहचान मामले से किस तरह जुड़ती है। इस पुष्टि के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट अहम होगी।
तीन मौतों को लेकर जांच के घेरे में आया परिवार
पुलिस जांच में परिवार के तीन सदस्यों की मौत को लेकर संदेह सामने आया है। इनमें भारती वसावा, मंजुला साधु और शांताबेन वसावा के नाम बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारती की मौत के मामले में हत्या का आरोप लगाया गया है, जबकि मंजुला और शांताबेन की मौत को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। शांताबेन की मौत को कोविड-19 से जोड़कर बताया गया था। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन मौतों के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और क्या उन्हें छिपाने के लिए बीमारी की कहानियां बनाई गई थीं।
पत्नी से विवाद के बाद पुलिस तक पहुंचा आरोपी
इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, माधवदास का उर्मिला से झगड़ा हुआ तो वह अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पहुंच गया। उसने शांताबेन की हत्या के मामले में अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत करने की कोशिश की।
हालांकि, पुलिस ने जब उसके बयान और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की, तो खुद माधवदास की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई। इसके बाद पूछताछ और जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसी प्रक्रिया में श्मशान घाट से अवशेष बरामद होने की बात सामने आई।
चार साल तक छिपा रहा मौतों का रहस्य
इस मामले ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि जिन मौतों को बीमारी या कोरोना से जोड़कर बताया गया था, उनकी परिस्थितियों पर वर्षों बाद संदेह पैदा हुआ। पुलिस अब बरामद अवशेषों, फॉरेंसिक जांच और अन्य सबूतों के आधार पर घटनाओं की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों और बरामद कंकाल की पहचान से जुड़े निष्कर्षों को जांच के अंतिम परिणामों के आधार पर ही स्पष्ट माना जा सकेगा। यह मामला दिखाता है कि किसी मौत के बारे में दी गई जानकारी पर संदेह पैदा होने पर वैज्ञानिक जांच और पुलिस की पड़ताल कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस जांच से संबंधित प्रकाशित जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले में बताए गए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी हो सकता है। कंकाल की पहचान और मौतों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जांच तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही की जानी चाहिए।



