सरकार ने बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियों की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमें उन्होंने स्टॉक रखने की तय सीमा से ज्यादा स्टॉक को बेचने के लिए और समय मांगा था. सरकार ने कंपनियों को आदेश दिया है कि वे 31 अगस्त तक अपना सारा अतिरिक्त स्टॉक बेच दें. हाल ही में स्टॉक रखने की समयसीमा को 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है. इसके तहत, बड़ी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को अपनी सामान्य जरूरत का सिर्फ 15 दिन का स्टॉक ही रखने की इजाजत है. खाद्य सचिव के साथ हुई बैठक में देश की कुछ बड़ी कंपनियों ने चेतावनी दी कि अगर वे अभी अपना स्टॉक बेच देती हैं और बाद में बाजार से चीनी खरीदती हैं, तो चीनी की कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं. उन्होंने सप्लाई कम होने पर एक्सपोर्ट ऑर्डर पूरे करने में आने वाली दिक्कतों पर भी चिंता जताई.

कंपनियों आरोपों को किया खारिज
ट्रेड अधिकारियों का कहना है कि अगर यह स्टॉक 31 अगस्त तक बाजार में वापस आ जाता है, तो इससे चीनी की कीमतें काफी कम हो सकती हैं. यह कदम ‘इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’ के उन आरोपों के बाद उठाया गया है जिनमें कहा गया था कि बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाली कंपनियों ने चीनी का स्टॉक जमा करके रखा है. कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.
बिस्किट बनाने वाली एक लिस्टेड कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि हम अपनी प्रोडक्शन की जरूरतों के हिसाब से सीज़नल स्टॉक जमा करते हैं, न कि दोबारा बेचने या सट्टेबाज़ी के लिए. मैं साबित कर सकता हूं कि हमारे द्वारा खरीदी गई चीनी का हर किलोग्राम बिस्किट या कैंडी जैसे खानेपीने के सामान में बदल दिया गया है.
उन्होंने आगे कहा कि हम चीनी को बिस्किट जैसे खानेपीने के सामान में बदलते हैं, जिन्हें आम लोग खाते हैं. अगर हम अभी अपनी हेज्ड चीनी बेच देते हैं, तो 15 दिन बाद हम फिर से तेजी से बाजार में लौटेंगे, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है. कुछ FMCG कंपनियां इस बात से खुश हैं कि सरकार के इस कदम से कीमतों में उतारचढ़ाव कम हो सकता है, क्योंकि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की तुलना में उतारचढ़ाव उनके कारोबार के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है.
सही है सरकार का फैसला
पार्ले के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हम सरकारी नियमों के अनुसार स्टॉक रखते हैं. हमारी जरूरत बहुत ज्यादा है, इसलिए अगर हम चाहें भी, तो ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं कर सकते. सरकार के कदम के बाद चीनी की कीमतें कम हुई हैं. इस कदम से सट्टेबाज़ी करने वालों पर लगाम लगेगी. इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अगर थोक खरीदार स्टॉक रखने की सीमा का पालन करते हैं, तो चीनी की कीमतें और कम हो सकती हैं. चीनी उद्योग के सीनियर एनालिस्ट जीके सूद ने कहा कि अगर थोक खरीदार कानूनी सीमा से ज्यादा स्टॉक को बेच देते हैं, तो हमें बाज़ार में लगभग 34 लाख टन अतिरिक्त चीनी मिल सकती है.
करना पड़ सकता है मुश्किलों का सामना
कुछ एनालिस्ट्स ने बताया कि MNC FMCG और फार्मा कंपनियों को, जिन्हें मंजूरशुदा मिलों से खास ग्रेड की चीनी की जरूरत होती है, समय पर सप्लाई पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. इंडस्ट्री बॉडी ISMA ने दावा किया था कि ट्रेडर्स और बड़े खरीदारों ने सट्टेबाजी के लिए खरीदारी की, जिससे बाजार में चीनी की बनावटी कमी पैदा हो गई. सूद ने कहा कि व्यापारिक संगठन का सारा दोष अपने ग्राहकों पर मढ़ना व्यापारिक नैतिकता के खिलाफ है. पश्चिम बंगाल में चीनी व्यापारियों के यहां हुई छापेमारी से व्यापारी समुदाय में हड़कंप मच गया है.



