भारत के कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि भले ही उनकी कप्तानी में टीम अभी तक कोई ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाई है, लेकिन वह इस भूमिका में पूरी तरह सहज हैं और उन्हें विश्वास है कि टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
गिल की कप्तानी में पहली टेस्ट सीरीज 22 से ड्रॉ रही। इसके बाद भारत घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका से सीरीज हार गया, हालांकि गर्दन की चोट के कारण गिल उस सीरीज के बड़े हिस्से में नहीं खेल सके।
भारत ने घरेलू टेस्ट सीरीज में अफगानिस्तान को आसानी से हराया था जो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं थी।

लेकिन गिल ने कहा कि वह बड़े लक्ष्य पर ध्यान दे रहे हैं।
श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में गिल ने कहा, ‘‘मैं कप्तानी की भूमिका में बहुत सहज हूं। पिछले एक साल में जिस तरह हमारी टीम आगे बढ़ी है, उसे देखकर मुझे काफी संतोष मिलता है। मुझे लगता है कि हम सही दिशा में सही कदम उठा रहे हैं। ’’
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत फिलहाल विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है और फाइनल में पहुंचने के लिए टीम को मजबूत प्रदर्शन करना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य लक्ष्य अगले साल होने वाले डब्ल्यूटीसी फाइनल में पहुंचना है। हमारे पास अभी लगभग नौ टेस्ट मैच हैं और क्वालीफाई करने के लिए हमें इनमें से छह या सात मैच जीतने होंगे। इसलिए श्रीलंका के खिलाफ यह सीरीज हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हमने इसकी अच्छी तैयारी की है। ’’
श्रीलंका के खिलाफ यह मुकाबला भारत का 600वां टेस्ट मैच होगा। इस ऐतिहासिक मौके पर टीम की कप्तानी करते हुए वह मंसूर अली खान पटौदी और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की सूची में शामिल हो जाएंगे।
गिल ने कहा, ‘‘अपने देश के लिए किसी भी टेस्ट मैच में कप्तानी करना बहुत बड़ा सम्मान है।
भारत के 600वें टेस्ट में टीम का नेतृत्व करना मेरे लिए गर्व की बात है और स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा करना इसे और भी खास बना देता है। ’’
गिल के बचपन के कोच सुखविंदर टिंकू ने कहा, ‘‘मैं बिलकुल भी हैरान नहीं हूं कि शुभमन बतौर कप्तान अच्छा कर रहा है। शुभमन हमेशा से सीखने के इच्छुक रहे हैं। जब वह छोटे थे, तब मुझे उन्हें कोई बात दो बार समझाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। वह बहुत तेज और सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे। ’’
गिल ने श्रीलंका के गॉल की परिस्थितियों पर कहा कि यहां पुरानी गेंद से स्पिनरों की भूमिका काफी अहम होती है, जैसा कि भारत में भी कई जगह देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ी समानता यह है कि गेंद पुरानी होने पर स्पिनरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि भारत में अलगअलग तरह की मिट्टी की पिचें हैं। गॉल में हाल के मैच में अच्छी उछाल देखने को मिली है जो भारत की लाल मिट्टी वाली पिच जैसी है। अगर आप मुंबई जैसी जगह पर खेलते हैं तो यहां की परिस्थितियां काफी मिलतीजुलती लगती हैं।



