यूपी के लखनऊ में एक पिन गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. इस गिरोह को पकड़ने के लिए 27 साल की एसआई सिद्धि मिश्रा खुद सड़क पर एक आम महिला बनकर कई दिनों तक घूमीं. अब जाकर इस गिरोह के सभी लोग पकड़े जा चुके हैं. ये लोग इतनी चालाकी से लूटपाट करते थे कि जानकर खुद पुलिस दंग रह गई.

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लखनऊ: न तो गोली चली, न चाकू निकला… बस एक सेफ्टी पिन, एक उल्टी का नाटक और कुछ पल की बातचीत… और लूट हो गई! शहर के ई-रिक्शे अपराध की चलती-फिरती फैक्ट्री बन गए थे. मगर, 27 साल की सब-इंस्पेक्टर सिद्धि मिश्रा ने चुपके से, बिना शोर मचाए, पूरे गिरोह को जाल में फंसा लिया. आइए जानते हैं सबकुछ.
ऐसे होती थी लूट
कहानी शुरू होती है भीड़ भरी सड़कों से. एक महिला अचानक उल्टी करने लगती, दूसरी पास खड़ी महिला चुभन महसूस करती हुई चीखती, अरे ये क्या हो रहा है? सबको बीमारी हो गई क्या? तीसरी तुरंत बात में शामिल हो जाती और कहती, बहनजी, लगता है कोई बीमारी फैल रही है… आप भी देखिए न. इन कुछ सेकंड्स में पीछे से हाथ घुस जाता और सोने की चेन, अंगूठी या नोट गायब. पीड़ित समझ भी नहीं पाते कि हुआ तो क्या हुआ.
700 सीसीटीवी और एसआई की मेहनत से खुला राज
महीनों से यह सिलसिला चल रहा था. शिकायतें बढ़ीं तो पुलिस ने 700 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाली, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला. तब मैदान में उतरी सिद्धि मिश्रा. 14 दिन तक वह कभी बुर्का पहनकर तो कभी साधारण साड़ी में ई-रिक्शों में घूमती रहीं. अवध चौराहा से चारबाग तक का सफर रोज तय करतीं. उन्होंने रिहर्सल किया था कि कैसे चलना है, कैसे खड़े होना है ताकि उनपर किसी का शक न जाए.
थोड़ा समय बीता. फिर आया मंगवार का दिन. उनकी नजर एक महिला पर पड़ी जो संदिग्ध हरकतें करती दिखी. इस पर सिद्धि मिश्रा ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया. आखिरकार वह दुबग्गा के एक झुग्गी इलाके तक पहुंच गईं. उन्होंने तुरंत पुलिस टीम को अलर्ट किया और छापा मारा. इस कार्रवाई में चार लोग गिरफ्तार हुए. गिरोह की सरगना शेषकला, उसका पति दयालाल, पूजा और गौरी उर्फ नजमा (जो गर्भवती है). उनके पास से चोरी की सोने की चेनें, अंगूठियां और चांदी की पायलें बरामद हुईं.
नागपुर से निकला कनेक्शन
कृष्णानगर के एसीपी रजनीश कुमार ने बताया कि आरोपी नागपुर के रहने वाले हैं. पूरा परिवार गिरोह है और कई शहरों में सक्रिय हैं. सिर्फ लखनऊ में ही वे इस तरह की एक दर्जन से ज्यादा वारदातों में शामिल रहे हैं. गैंग लीडर शेषकला ने पूछताछ में खुलासा किया कि गैंग के सभी सदस्य एक ही परिवार के हैं और पकड़े जाने से बचने के लिए वे झुग्गी-बस्तियों में रहते थे. दिन के समय, वे सड़क पर सामान बेचने वाले बनकर घूमते थे और भीड़भाड़ वाले बाजारों और ट्रांसपोर्ट हब में आसान शिकार की तलाश करते थे… खासकर बुज़ुर्गों या ऐसे लोगों की जिन्होंने दिखाई देने वाले गहने पहने हों.
अधिकारी ने कहा कि जैसे ही कोई शिकार ई-रिक्शा में बैठता था, गैंग में से एक सदस्य उल्टी आने का नाटक करता, फिर पीड़ित को पिन चुभा देता… और कुछ ही पलों में कीमती सामान चुरा लेते थे और फिर भीड़ में गायब हो जाते थे. गिरफ्तारी से बचने के लिए, वे अक्सर अपनी जगह, हुलिया और यहां तक कि पहचान के दस्तावेज भी बदल लेते थे. सिद्धि मिश्रा की इस शानदार कार्रवाई ने न सिर्फ लखनऊ के एक बड़े अपराध नेटवर्क को तोड़ा है, बल्कि ये भी साबित किया है कि कभी-कभी सबसे ताकतवर हथियार होते हैं- धैर्य, सटीक नजर और साहस की चुप्पी



