आजकल का कामकाज ज्यादातर डेस्क पर बैठकर ही होता है, इसलिए दिन में कई घंटे लगातार बैठे रहना लगभग हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है. लेकिन लंबे समय तक शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना सिर्फ कमर दर्द या वजन बढ़ने की वजह नहीं बनता, बल्कि इसका असर किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है. हालांकि, सिर्फ बैठे रहने से सीधे तौर पर किडनी खराब नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल कई ऐसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है, जो आगे चलकर किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं.

लंबे समय तक फिजिकली एक्टिव न रहने से वजन बढ़ सकता है, शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता और मेटाबॉलिक हेल्थ भी खराब हो सकती है. इसके साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा भी रहता है. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर, दोनों ही क्रॉनिक किडनी डिजीज के बड़े जोखिम कारकों में शामिल हैं. समय के साथ ये दोनों स्थितियां किडनी की छोटीछोटी ब्लड वेसल्स और उन हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जो खून को फिल्टर करने का काम करते हैं. इससे धीरेधीरे किडनी की काम करने की क्षमता कम हो सकती है.
ब्लड सर्कुलेशन पर पड़ता है असर
डॉ. अनुपम रॉय बताते हैं कि एक और ऐसी चीज है जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता. वह है ब्लड सर्कुलेशन. जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो हमारी मांसपेशियां कम काम करती हैं और शरीर की कुल शारीरिक गतिविधि भी कम हो जाती है. अगर इसके साथ खानपान ठीक न हो, एक्सरसाइज कम हो और नींद भी पूरी न हो, तो शरीर में ऐसा मेटाबॉलिक माहौल बन सकता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
अच्छी बात यह है कि रोज़मर्रा की जिंदगी में छोटेछोटे बदलाव करके काफी फायदा हो सकता है. जिन लोगों का काम डेस्क पर बैठकर होता है, उन्हें लगातार कई घंटों तक बैठे रहने से बचना चाहिए. बीचबीच में थोड़ी देर के लिए उठकर चलना, फोन पर बात करते समय टहलना, जहां संभव हो वहां लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और हफ्ते में नियमित रूप से थोड़ी तेज़ या मध्यम स्तर की एक्सरसाइज करना दिल और शरीर की मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने में मदद कर सकता है.
कई मामलों में लक्षणों का नहीं चलता पता
यह भी याद रखना जरूरी है कि किडनी की बीमारी कई बार बिना किसी साफ लक्षण के धीरेधीरे बढ़ सकती है. जिन लोगों का वजन ज्यादा है, जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, परिवार में किसी को किडनी की बीमारी रही है या किडनी की बीमारी के दूसरे जोखिम हैं, उन्हें अपने डॉक्टर से बात करके यह समझना चाहिए कि उन्हें किडनी की जांच कब और कितनी बार करवानी चाहिए.
इसलिए किडनी की सेहत को शरीर की बाकी सेहत से अलग करके नहीं देखना चाहिए. जो चीजें हमारे दिल, ब्लड वेसल्स और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए अच्छी हैं, वे आमतौर पर किडनी के लिए भी फायदेमंद होती हैं. लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बीच छोटेछोटे ब्रेक लेना एक आसान लाइफस्टाइल बदलाव है, जो लंबे समय तक किडनी को स्वस्थ रखने की कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.



