IndiaUttar Pradesh

​वाराणसी में BJP को घेरने के लिए सपा-कांग्रेस का BBP फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वाराणसी में सियासी समीकरण साधने की तैयारी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन यहां ब्राह्मण, भूमिहार और पटेल वोटरों को एक साथ लाने के लिए BBP फॉर्मूले पर काम कर रहा है. गठबंधन की रणनीति वाराणसी की उन विधानसभा सीटों पर फोकस करने की है, जहां अलगअलग जातीय समूहों के वोट चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं.

​वाराणसी में BJP को घेरने के लिए सपा-कांग्रेस का BBP फॉर्मूला

इस रणनीति को लेकर 31 अक्टूबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे पर निगाहें टिकी हैं. सपाकांग्रेस की नजर वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में से चार सीटों पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया और कैंट पर है. गठबंधन इन सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जातीय समीकरणों के साथसाथ स्थानीय नाराजगी को भी मुद्दा बनाएगी. रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सपा नेता सुरेंद्र पटेल सक्रिय हैं.

लोकसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न पर गठबंधन की नजर

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने टीवी9 से बातचीत में कहा कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर काफी कम कर दिया था. उन्होंने कहा कि इस बार कोशिश वाराणसी में बीजेपी को बड़ा राजनीतिक झटका देने की है. अजय राय के मुताबिक, गठबंधन लोकसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न को आधार बनाकर भूमिहार और पटेल वोटरों के साथ ब्राह्मण समाज को भी अपने साथ जोड़ना चाहता है.

अजय राय का दावा है कि मौजूदा सरकार से नाराज दूसरे सामाजिक समूहों का भी गठबंधन को सहयोग मिल सकता है.अजय राय ने 2017, 2019 और 2022 के चुनावों के वोटिंग पैटर्न का हवाला देते हुए कहा कि ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता कई मौकों पर एक साथ वोट करते रहे हैं. उनका दावा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी यह रुझान दिखाई दे सकता है और दोनों समुदाय गठबंधन के पक्ष में मतदान कर सकते हैं.

सुरेंद्र पटेल का दावा नाराजगी को गठबंधन के पक्ष में बदलने की कोशिश

सपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र पटेल का कहना है कि मौजूदा सरकार से अलगअलग समाजों और जातियों में नाराजगी है. उनके मुताबिक, पटेल, भूमिहार और ब्राह्मण समाज के लोगों में यह नाराजगी अधिक दिखाई देती है. सुरेंद्र पटेल ने कहा कि यादव और मुस्लिम मतदाता पहले से ही सपाकांग्रेस गठबंधन का पारंपरिक वोट आधार माने जाते हैं. अगर इन मतदाताओं के साथ पटेल, भूमिहार और ब्राह्मण समाज का समर्थन जुड़ता है तो वाराणसी में गठबंधन की रणनीति का असर दिखाई दे सकता है.

रोहनिया में पटेल वोटरों पर खास नजर

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विजय नारायण के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी के लिए ओबीसी समुदायों में पटेल और मौर्य मतदाताओं तथा सवर्ण समुदायों में भूमिहार मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी. उनका मानना है कि अगर सपाकांग्रेस गठबंधन ब्राह्मण, भूमिहार और पटेल मतदाताओं को एक साथ लाने में सफल होता है तो वाराणसी के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबले का स्वरूप प्रभावित हो सकता है.

विजय नारायण के आकलन के मुताबिक, रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में करीब एक लाख पटेल मतदाता और लगभग 50 हजार ब्राह्मण एवं भूमिहार मतदाता हैं. यादव और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को भी जोड़कर गठबंधन करीब सवा दो लाख वोटों तक पहुंचने की संभावना का दावा कर रहा है. इस सीट पर गठबंधन की रणनीति पटेल मतदाताओं के साथ ब्राह्मण और भूमिहार समाज को जोड़ने की है.

सेवापुरी में भी जातीय समीकरण साधने की कोशिश

सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में भी गठबंधन पटेल मतदाताओं को महत्वपूर्ण मान रहा है. विजय नारायण के अनुमान के मुताबिक, यहां करीब सवा लाख पटेल मतदाता और लगभग 50 हजार ब्राह्मण एवं भूमिहार मतदाता हैं. गठबंधन की गणना में यादव और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन जुड़ने पर करीब सवा दो लाख वोटों तक पहुंचने की संभावना शामिल है. इसी आधार पर सेवापुरी को गठबंधन की रणनीति के प्रमुख क्षेत्रों में रखा जा रहा है.

पिंडरा में ब्राह्मणभूमिहार और पटेल वोटों पर जोर

पिंडरा विधानसभा सीट पर भी BBP फॉर्मूले के जरिए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश की जा रही है. विजय नारायण के मुताबिक, यहां करीब 70 हजार पटेल और लगभग 80 हजार ब्राह्मण एवं भूमिहार मतदाता हैं. इनके साथ करीब 50 हजार यादव और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन जुड़ने पर गठबंधन को एक संभावित चुनावी आधार दिखाई देता है.गठबंधन की रणनीति इन समुदायों को एक साथ लाकर बीजेपी के पारंपरिक समर्थन आधार को चुनौती देने की है.

कैंट सीट पर अलग तरह की चुनौती

वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है. विजय नारायण के अनुमान के मुताबिक, यहां पटेल मतदाता करीब 10 हजार हैं. ऐसे में गठबंधन की रणनीति केवल पटेल वोटों पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्या चार सीटों पर बदल सकता है मुकाबला?

सपाकांग्रेस गठबंधन की रणनीति का केंद्र ब्राह्मण, भूमिहार और पटेल मतदाताओं को एक साझा समीकरण में लाना है. इसके साथ यादव और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को जोड़ने की कोशिश है. गठबंधन को उम्मीद है कि इससे पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया और कैंट में मुकाबले की स्थिति बदल सकती है. सुरेंद्र पटेल ने शिवपुर और अजगरा में भी इस समीकरण का असर पड़ने की संभावना जताई है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply