Business

स्पाइसजेट के शेयरों में आज फिर लगा अपर सर्किट, क्या ATF पर सरकार देने जा रही है ‘संजीवनी’?

Satya Report: शेयर बाजार में एविएशन सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है. लगातार दूसरे दिन स्पाइसजेट (SpiceJet) के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई है. आज 22 अप्रैल को कंपनी के शेयरों ने फिर से 5% का अपर सर्किट छुआ और यह 14.62 रुपये पर लॉक हो गए. इस तूफानी तेजी के पीछे एक बड़ी वजह है. दरअसल, ऐसी चर्चा है कि सरकार एयरलाइंस कंपनियों को बड़ी राहत देने का मन बना रही है. ईंधन की महंगी कीमतों से जूझ रहे इस सेक्टर के लिए अगर टैक्स में कटौती का ऐलान होता है, तो न सिर्फ स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के दिन बदल सकते हैं, बल्कि भविष्य में इसका फायदा बाजार और मुसाफिरों को भी मिल सकता है.

स्पाइसजेट के शेयरों में आज फिर लगा अपर सर्किट, क्या ATF पर सरकार देने जा रही है ‘संजीवनी’?
स्पाइसजेट के शेयरों में आज फिर लगा अपर सर्किट, क्या ATF पर सरकार देने जा रही है ‘संजीवनी’?

लगातार तेजी के पीछे का ‘सीक्रेट’

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच स्पाइसजेट का प्रदर्शन निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. इस महीने की शुरुआत से लेकर अब तक, इस एयरलाइन के स्टॉक में 50.1% का शानदार उछाल आ चुका है. हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह राहत अभी नाकाफी लग सकती है, क्योंकि पिछले एक साल के रिकॉर्ड को देखें तो शेयर अब भी करीब 70.6% के भारी नुकसान में ट्रेड कर रहा है. दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ स्पाइसजेट का स्टॉक आसमान छू रहा है, वहीं देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Indigo) के निवेशकों को मामूली निराशा हाथ लगी है. कारोबार के अंत में इंडिगो का शेयर 0.81 फीसदी टूटकर 4,655.00 रुपये के स्तर पर बंद हुआ. .

एविएशन सेक्टर को मिलेगी सरकारी मदद?

मनी कंट्रोल की एक खबर के मुताबिक, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रहा है. इस अहम चर्चा का मुख्य एजेंडा है- एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) में कटौती करना. किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल खर्च का एक बहुत बड़ा हिस्सा हवाई ईंधन यानी ATF पर जाता है. ऐसे में अगर टैक्स कम होता है, तो कंपनियों की बैलेंस शीट पर सीधा और सकारात्मक असर पड़ेगा.

अलग-अलग राज्यों में टैक्स का भारी बोझ

मौजूदा व्यवस्था में हवाई ईंधन पर टैक्स की दरें हर राज्य में अलग-अलग हैं. यह विसंगति एयरलाइंस के लिए एक बड़ी चुनौती है. उदाहरण के तौर पर, देश की राजधानी दिल्ली में ATF पर लगभग 25 प्रतिशत वैट वसूला जाता है. वहीं, तमिलनाडु में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत के करीब है. पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी एयरलाइंस को ईंधन पर लगभग 18 प्रतिशत टैक्स चुकाना पड़ता है. यही वजह है कि सरकार अब पूरे देश में एयरलाइंस के लिए इस बोझ को कम करने की तैयारी में है.

राहत के दो अहम विकल्पों पर मंथन

सूत्रों की मानें तो सरकार फिलहाल दो मुख्य विकल्पों पर गहराई से विचार कर रही है. पहला विकल्प यह है कि तीन से छह महीने की एक तय अवधि के लिए वैट में अस्थायी कटौती कर दी जाए. इससे उन एयरलाइंस को फौरी राहत मिलेगी जो इस वक्त ऊंचे खर्चों से जूझ रही हैं. दूसरा विकल्प यह है कि हवाई अड्डों पर ट्रैफिक के हिसाब से टैक्स कम किया जाए. इसका सीधा मतलब है कि दिल्ली और मुंबई जैसे सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स, जहां सबसे ज्यादा उड़ानों के कारण ईंधन की खपत सबसे अधिक होती है, वहां वैट में विशेष छूट दी जाए.

अगर सरकार की तरफ से इन प्रस्तावों को हरी झंडी मिल जाती है, तो इसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ेगा. स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस, जो लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं, उनके लिए यह कदम किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होगा.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply