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गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

भारतीय कुश्ती के इतिहास में जब भी महान पहलवानों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले जिन नामों में एक नाम लिया जाता है, वह है गामा पहलवान। उनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट (प्रचलित रूप से गुलाम हुसैन बख्श के नाम से भी उल्लेख मिलता है) था। अपनी असाधारण ताकत, अनुशासन और अजेय प्रदर्शन के कारण उन्हें ‘रुस्तम-ए-हिंद’, ‘रुस्तम-ए-जमां’ और ‘द ग्रेट गामा’ जैसे खिताब मिले।

कहा जाता है कि अपने लंबे कुश्ती करियर में गामा पहलवान किसी भी आधिकारिक मुकाबले में पराजित नहीं हुए। यही वजह है कि आज भी उन्हें दुनिया के सबसे महान पहलवानों में गिना जाता है।

बचपन से ही शुरू हो गई थी पहलवानी

गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के पंजाब क्षेत्र में हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनका पालन-पोषण परिवार के अन्य सदस्यों ने किया। कम उम्र से ही उन्हें कुश्ती और व्यायाम का प्रशिक्षण मिलने लगा। उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें किशोरावस्था में ही पहचान दिलानी शुरू कर दी थी।

ऐसी थी गामा पहलवान की ट्रेनिंग

गामा की फिटनेस आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है। विभिन्न ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उनकी रोजाना की ट्रेनिंग बेहद कठिन होती थी।

  • प्रतिदिन लगभग 5,000 बैठक (Squats) लगाते थे।
  • करीब 3,000 दंड (Push-ups) करते थे।
  • अभ्यास के दौरान रोज लगभग 40 पहलवानों से कुश्ती लड़ते थे।
  • कई किलोमीटर दौड़ लगाना और भारी पत्थरों व लोहे के उपकरणों से अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

उनका मानना था कि लगातार अभ्यास ही किसी पहलवान की सबसे बड़ी ताकत होता है।

गामा पहलवान की ताकत के चर्चे

गामा की शारीरिक क्षमता को लेकर कई किस्से मशहूर हैं। कहा जाता है कि वे लगभग 95 किलोग्राम के भारी व्यायाम चक्र से अभ्यास करते थे। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, उन्होंने एक बार लगभग 1,200 किलोग्राम वजनी पत्थर को भी उठाया था। हालांकि, इस दावे के ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन यह उनकी असाधारण ताकत की लोकप्रिय कहानियों में शामिल है।

क्या खाते थे गामा पहलवान?

उनकी भारी-भरकम ट्रेनिंग के लिए भरपूर पोषण भी जरूरी था। विभिन्न स्रोतों में उनकी डाइट का उल्लेख इस प्रकार मिलता है—

  • कई लीटर दूध
  • देसी घी
  • मक्खन
  • मांस
  • बादाम और अन्य सूखे मेवे
  • ताजे मौसमी फल और फलों का रस

उनका भोजन शरीर की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए तैयार किया जाता था।

विदेशी पहलवानों को भी दी मात

गामा पहलवान ने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इंग्लैंड सहित कई देशों में उन्होंने प्रसिद्ध पहलवानों को चुनौती दी और कई मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की। उनकी तकनीक, ताकत और फुर्ती ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान दिलाया।

क्यों कहलाए ‘रुस्तम-ए-हिंद’?

भारत के कई दिग्गज पहलवानों को हराने के बाद गामा को ‘रुस्तम-ए-हिंद’ की उपाधि दी गई। यह सम्मान उस दौर में किसी भी पहलवान के लिए सबसे प्रतिष्ठित माना जाता था। इसके बाद उनका नाम पूरी दुनिया में ‘द ग्रेट गामा’ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

विभाजन के बाद का जीवन

भारत के विभाजन के बाद गामा पाकिस्तान चले गए। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक युवा पहलवानों को प्रशिक्षण दिया। बाद में उन्हें अस्थमा और हृदय रोग जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ा।

23 मई 1960 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी उपलब्धियां आज भी कुश्ती प्रेमियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

गामा पहलवान से जुड़ी रोचक बातें

  • अपने पूरे आधिकारिक कुश्ती करियर में अजेय रहने के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • रोज हजारों दंड और बैठक लगाने के लिए जाने जाते थे।
  • अभ्यास के दौरान कई पहलवानों से लगातार कुश्ती लड़ते थे।
  • उनकी फिटनेस और अनुशासन आज भी पहलवानों के लिए प्रेरणा माने जाते हैं।
  • उन्हें भारतीय कुश्ती इतिहास के सबसे महान पहलवानों में गिना जाता है।

निष्कर्ष

गामा पहलवान सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास की जीती-जागती मिसाल थे। उनकी कड़ी ट्रेनिंग, अद्भुत ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने उन्हें विश्वभर में पहचान दिलाई। आज भी जब महान पहलवानों की बात होती है, तो ‘द ग्रेट गामा’ का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

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