नीट पेपर लीक मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणियां की. कोर्ट ने कहा कि नीट पेपर लीक कैसे हुआ इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. सभी सिफारिशों को लागू किया गया तो ऐसा कैसे हुआ, आखिर सच्चाई क्या है? कोर्ट ने समिति के अध्यक्ष से कहा कि हम आपसे पूछना चाहते हैं कि आप मूल रूप से विशेषज्ञ समिति के सदस्य थे, कार्यान्वयन की निगरानी कितनी हुई? यह विफलता कैसे हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एचपीसी की सिफारिशों के आधार पर आपकी निगरानी के बावजूद, यदि यह घटना घटी है, तो सिफारिश में ही कोई समस्या है. या हो सकता है कि निगरानी हुई ही न हो. सुप्रीम कोर्ट ने एसजी मेहता से कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है. आखिर ये कैसे हुआ, हकीकत सामने आनी चाहिए.
सुनवाई के दौरान डॉ.राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हमने 60 सुझाव दिए थे. पहले 60 में से अधिकतर लागू हो चुके हैं. कुछ अभी भी प्रक्रियाधीन हैं. 2025 में NEET UG परीक्षा संतोषजनक ढंग से आयोजित की गई थी. कुछ केंद्रों में बिजली गुल होने की घटनाएं हुईं, अन्यथा सिफारिशों को लागू किया गया और परीक्षा सफल रही. हमने एनटीए को मजबूत करने की सिफारिश की थी.
उन्होंने कहा कि सवाल कागजों में हेराफेरी का था. कई उपाय लागू किए जा चुके हैं, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अगले महीने होने वाली रीनीट परीक्षा के लिए इन सभी का ध्यान रखा गया है. इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि क्या समिति नियमित रूप से बैठक करती है? राधाकृष्णन ने जवाब में कहा जी हां. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि असली समस्या, तब तक हल नहीं होगी जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं हो जाती.



