
विशेष संवाददाता, हल्द्वानी, अमृत विचार : अल्मोड़ा का मूल निवासी और चर्चित निठारी कांड का आरोपी हरिद्वार में फांसी के फंदे पर लटका मिला। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह मामला खुदकुशी का लग रहा है। इसी कड़ी में याद कीजिए 12 साल पहले इसी महीने 9 सितंबर 2014 का वह दिन जब सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं।
इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिए मिला। बाद में फांसी टल गई। लेकिन नियति ने संभवत: उसके लिए फांसी ही तय कर रखीं थी? …तारीख का मूलांक भी नौ और उसका मृत शरीर शुक्रवार को उसकी ही चाय की दुकान में फांसी के फंदे पर लटका मिला। पहलू यह है कि यह चाय की दुकान कोहली ने अजमानत मिलने के बाद खोली थी।
सुरेंद्र कोली नोएडा के निठारी इलाके में एक के बाद एक कई नरकंकाल मामले में कई बार मौत की सजा मिली थी। कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद 16 अक्तूबर 2023 को बरी हो गया था। कहा जाता है कि सुरेंद्र कोली एक माहिर कुक था लेकिन शुरुआती गांव के दिनों में गरीबी के कारण खुद खाने को मोहताज रहता था। उसका परिवार बेहद गरीबी में अल्मोड़ा के पास के एक गांव में गुजारा करता था। स्थानीय बताते हैं कि लगभग 27 बरस पहले वह गांव की बकरियों की देखरेख करता था।
साल 2000 में उसकी मुलाकात दिल्ली में रहने वाले एक ब्रिगेडियर से हुई। अच्छा कुक होने के कारण ब्रिगेडियर ने उसे नौकरी दी। बाद में वह ब्रिगेडियर के साथ गांव से दिल्ली चला गया। वहां वह उनके घर पर ही रहकर खाना बनाता था और साफसफाई करता था। तब तक वह सामान्य जिंदगी गुजार रहा था और उसकी आपराधिक प्रवृत्ति उस भी किसी को नजर नहीं आयी।
बहरहाल, जब निठारी कांड हुआ तो मामाले खुलासा करने में खास भूमिका निभाने वाले नोएडा के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि साल 2003 में जब ब्रिगेडियर दिल्ली से बाहर चला गया तो इसके बाद कोली मोनिंदर सिंह पंढेर के संपर्क में आया।
दरअसल, वह दिल्लीएनसीआर में रहकर काम करना चाह रहा था। इसलिए वह पंढेर के नोएडा सेक्टर31 स्थित डी5 कोठी में काम करने को तैयार हो गया था। बताते हैं कि, बाद में कोली अपनी पत्नी को भी नोएडा ले आया था। साल 2004 में पंढेर का परिवार भी नोएडा से बाहर चला गया था। इसके बाद कोली ने भी अपनी पत्नी को गांव भेज दिया था। इस तरह कोठी में पंढेर और कोली ही अब रहने लगे थे। महीनों तक अकेले रहने के दौरान ही सामान्य रहने वाले कोली की जिंदगी में हैवानियत की शुरुआत हुई थी।
पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं। कोली ही उनके लिए खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था। जांचकर्ताओं ने बताया कि धीरेधीरे वह नेक्रोफीलिया के प्रति यौन आकर्षण या शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा होती है। इसे हिंदी में ‘शव कामुकता’ भी कहा जाता है।) नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित हो गया था।



