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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अज्ञात पर सस्पेंस, पुलिस FIR में अननोन को शामिल क्यों करती है?

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान और चढ़ावे के रूप में दी गई राशि के कथित गबन के मामले में SIT की जांच रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने 8 नामजद लोगों के साथ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. एफआईआर में रमाशंकर यादव , अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करुणेश और लवकुश मिश्रा का नाम दर्ज किया गया है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अज्ञात पर सस्पेंस, पुलिस FIR में अननोन को शामिल क्यों करती है?

यह एफआईआर चोरी, चोरी में मदद करना, गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारी या संस्थाकर्मी के द्वारा आपराधिक षडयंत्र के तहत विश्वासघात की धाराओं में दर्ज की गई है. इसके लिएभारतीय न्याय संहिता की धारा 61, 306, 316, 173 और 317 का इस्तेमाल किया गया है. इसमें कई धाराएं ऐसी हैं, जिसमें जांच के दौरान अगर आरोप सही पाए गए तो आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.

पुलिस कई बार गंभीर केसेज में अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करती है. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भी 8 नामजद लोगों के साथसाथ एक अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस किसी केस में अज्ञात के खिलाफ मामला इसलिए दर्ज करती है, ताकि जांच के दौरान अन्य संभावित आरोपियों को भी कानून के दायरे में लाया जा सके हैं. इसके लिए पुलिस BNSS की धारा 173 का इस्तेमाल करती है.

मुख्य बातें

  • जांच का दायरा खुला रहे, इसलिए पुलिस अपने एफआईआर में अज्ञात नाम का जिक्र करती है.
  • केस में नया आरोपी सामने आने पर अलग से कोई एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.
  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भी 8 नामजद के साथ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा.
  • पुलिस का माननाइस मामले में अभी और भी नाम सामने आने संभावना

अज्ञात का है जिक्र, तो अलग से नहीं दर्ज करना होगा FIR

कई बार आपराधिक मामलों में आगे चलकर कई अन्य व्यक्तियों की भी भूमिका पुलिस सामने आती है. ऐसे में अगर पुलिस ने अपने एफआईआर में धारा 173 के तहत अज्ञात का जिक्र किया है तो उसे उस मामले में आरोपी बनाने में आसानी होती है. यही वजह है कि पुलिस अपने एफआईआर में अज्ञात आरोपी को शामिल करती है, ताकि जांच का दायरा खुला रहे और अन्य संभावित आरोपियों को आगे चलक उसी मामले में नामजद किया जा सके. ऐसे में पुलिस को अलग से कोई एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है.

किनकिन परिस्थितियों में दर्ज किया जाता है अज्ञात पर FIR

अज्ञात के खिलाफ एफआईआर ज्यादार चोरी, दुर्घटना और अनजान लोगों द्वारा मारपीट, धोखाधड़ी, भीड़ द्वारा हिंसा जैसे मामलों में ही दर्ज कराया जाता है. यह तब दर्ज की जाती है, जब अपराध हुआ हो, लेकिन शिकायतकर्ता आरोपी को न जानता हो या फिर मामले में अपराधी की पहचान संदिग्थ हो और स्थापित ना हो पाई है. इसके अलावा अगर आरोपी की पहचान करने के लिए जांच की आवश्यकता तो भी ऐसे मामलों में पुलिस एफआईआर में अज्ञात का उल्लेख करती है.

अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR की अनुमति क्यों है?

कई अपराध अनजान लोगों द्वारा किए जाते हैं. चोरी, डकैती, सड़क दुर्घटनाएं, ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में पीड़ित तुरंत अपराधियों की पहचान नहीं कर पाते हैं. ऐसे में पुलिस इस तरह के मामले में एफआईआर दर्ज कर सबूत इकट्ठा करने से लेकर अपराधियों तक पहुंचने का काम करती है.अपराधी की पहचान स्थापित होने पर वह अज्ञात की जगह उसी एफआईआर में पकड़े गए आरोपी का नाम जोड़ देती है.

हर मामले में आरोपी के नाम की जरूरत होती कई मामले रिपोर्ट नहीं हो पाते

अगर FIR के लिए हर मामले में ज्ञात आरोपी की जरूरत होती तो कई अपराध रिपोर्ट ही नहीं हो पाते. चोरी, डकैती, सड़क दुर्घटनाएं, ऑनलाइन धोखाधड़ी या फिर ऐसे मामले जिसमें अपराधी का पहचान स्थापित ना हो, उसपर एफआईआर दर्ज करने से मना नहीं कर सकती है. अगर पुलिस ऐसा करने से मना मना करती है, तो शिकायतकर्ता उनके सीनियर अधिकारी या फिर मजिस्ट्रेट से उसके खिलाफ शिकायत कर सकता है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कई और नाम आ सकते हैं सामने

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस द्वारा अपराधिक साजिश की BNSS की धारा 61 को भी जोड़ा है. इसका मतलब साफ है कि जांच एजेंसियां इस मामले को सिर्फ 8 नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं मान रही हैं. पुलिस का मानना है कि जांच के दौरान साजिश के तार अन्य लोगों से भी जुड़ सकते हैं.

दरअसल, आपराधिक साजिश के मामलों में अक्सर वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और आरोपियों के आपसी संपर्कों की गहनता से जांच करनी होती है. राम मंदिर मामले में जांच एजेंसियों को और सतर्कता से इसकी जांच करनी होगी. ऐसे में आगे चलकर अगर किसी अन्य व्यक्ति का इस मामले में भूमिका उजागर होगी, तो उसे बिना नई एफआईआर दर्ज किए इसी मामले में आरोपी बनाया जा सकेगा.

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