
लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश में राज्यपाल के कार्यकाल और KGMU कुलपति की पुनर्नियुक्ति को लेकर पूर्व मंत्री ने तीखे सवाल किये है। इतना ही नहीं नियमों की अनदेखी का आरोप भी लगाया है।
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दरअसल, मंगलवार को स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर दो तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनके यह सवाल उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के कार्यकाल और केजीएमयू कुलपति को दोबारा से कुलपति की जिम्मेदारी दिये जाने को लेकर हैं।
उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है, लेकिन 5 वर्ष पूरे होने के बाद भी 7 वर्ष तक पद पर बने रहना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है। यदि कार्यकाल बढ़ाने या पुनर्नियुक्ति का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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वहीं KGMU की कुलपति पर भ्रष्टाचार और आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप लगने के बावजूद पुनः नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि सवाल सीधा है कि जब नियुक्तियों में नियम और संविधान का पालन नहीं होगा, तो SC/ST/OBC समाज को बराबरी का प्रतिनिधित्व और न्याय कैसे मिलेगा? मौर्य ने दो टूक कहा कि पद कितना भी बड़ा हो, संविधान से ऊपर कोई नहीं हो सकता।
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