
कब्ज पाचन तंत्र से जुड़ी एक आम समस्या है। इसमें मल त्याग सामान्य से कम हो सकता है, मल कठोर या सूखा हो सकता है और पेट साफ करने में परेशानी महसूस हो सकती है। कई लोगों में कम फाइबर वाला खानपान, पर्याप्त पानी न पीना, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार तनाव जैसी आदतें कब्ज की समस्या को बढ़ा सकती हैं।
ऐसे में डाइट में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करना मददगार हो सकता है। शकरकंद भी ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है, जिसमें फाइबर के साथ कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, शकरकंद को पुरानी या गंभीर कब्ज का इलाज नहीं माना जा सकता।
शकरकंद कब्ज में कैसे मदद कर सकता है?
फाइबर का अच्छा स्रोत है शकरकंद
एक मध्यम आकार के शकरकंद में करीब 4 ग्राम के आसपास फाइबर पाया जा सकता है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर मौजूद होते हैं।
फाइबर मल में मात्रा बढ़ाने और आंतों की सामान्य गतिविधि को बनाए रखने में मदद कर सकता है। पर्याप्त फाइबर के साथ पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि अचानक बहुत ज्यादा फाइबर बढ़ाने और पर्याप्त पानी न पीने से कुछ लोगों को उल्टा पेट फूलने या असहजता की समस्या हो सकती है।
रेसिस्टेंट स्टार्च की भी भूमिका
शकरकंद में स्टार्च पाया जाता है। इसे पकाने और फिर ठंडा करने के बाद स्टार्च का कुछ हिस्सा रेसिस्टेंट स्टार्च में बदल सकता है। यह बड़ी आंत तक पहुंचकर वहां मौजूद कुछ लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम कर सकता है।
इस तरह यह आंतों के माइक्रोबायोम और पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता।
मैनिटोल भी पाया जाता है
शकरकंद में प्राकृतिक रूप से मैनिटोल नामक शुगर अल्कोहल भी पाया जाता है। यह आंतों में पानी की मात्रा को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों में मल को नरम करने में मदद कर सकता है।
हालांकि, ज्यादा मात्रा में मैनिटोल कुछ लोगों में गैस, पेट फूलने या दस्त जैसी समस्या भी पैदा कर सकता है। इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
कब्ज में शकरकंद कैसे खाएं?
शकरकंद को उबालकर, भाप में पकाकर या भूनकर खाया जा सकता है। इसे बहुत ज्यादा तेल या घी में तलकर खाने से बचना बेहतर है।
अगर आप इसे छिलके के साथ खाना चाहते हैं तो शकरकंद को अच्छी तरह धोना जरूरी है। छिलके में भी फाइबर और अन्य पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व पाए जाते हैं।
इसे उबालकर या भूनकर हल्के मसालों के साथ खाया जा सकता है। स्वाद के लिए थोड़ा नींबू, जीरा या सीमित मात्रा में काला नमक इस्तेमाल किया जा सकता है।
ठंडा करके खाने का क्या फायदा हो सकता है?
शकरकंद को पकाने के बाद ठंडा करने से उसमें मौजूद स्टार्च का कुछ हिस्सा रेसिस्टेंट स्टार्च में बदल सकता है। इसे दोबारा गर्म करने के बाद भी इसका कुछ हिस्सा मौजूद रह सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में इस तरह शकरकंद खाने से कब्ज तुरंत दूर हो जाएगी। कब्ज से राहत के लिए पूरे खानपान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कब्ज से बचने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
सिर्फ शकरकंद खाने के बजाय रोजाना की आदतों में भी कुछ बदलाव करना जरूरी है।
- डाइट में पर्याप्त फाइबर शामिल करें।
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालें।
- मल त्याग की इच्छा को बार-बार न रोकें।
- फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को खानपान में शामिल करें।
- बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कब्ज लंबे समय से बनी हुई है या घरेलू उपायों और खानपान में बदलाव के बावजूद समस्या ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
खास तौर पर पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, मल में खून, बिना वजह वजन कम होना या अचानक गंभीर कब्ज जैसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जरूरी बात
शकरकंद फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है और संतुलित डाइट में इसे शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइबर और रेसिस्टेंट स्टार्च कुछ लोगों में आंतों की सेहत और नियमित मल त्याग में मदद कर सकते हैं। लेकिन पुरानी कब्ज के लिए केवल शकरकंद पर निर्भर रहना सही नहीं है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। इसे चिकित्सीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प न मानें। लगातार या गंभीर कब्ज की समस्या होने पर योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।



