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भालू ने शरीर पर किए 60 गहरे घाव, फिर भी नहीं मानी हार; 45 मिनट तक एक पैर से साइकिल चलाकर बचाई जान..

कनाडा में एक शख्स के साथ जंगल में ऐसा खौफनाक हादसा हुआ था, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। साइकिल से जंगल के रास्ते से गुजर रहे इस व्यक्ति का सामना अचानक एक विशाल ग्रिजली भालू से हो गया था। देखते ही देखते भालू ने उस पर हमला कर दिया और शरीर को बुरी तरह जख्मी कर दिया था।

यह घटना ब्रिटिश कोलंबिया की बताई गई थी। 47 वर्षीय व्यक्ति जंगल के रास्ते पर साइकिल चला रहा था। वह पहले कई बार काले भालू देख चुका था और उसे लगा था कि शांत रहने पर भालू खुद वहां से चला जाएगा। इसलिए वह बिना घबराए खड़ा रहा था।

लेकिन इस बार सामने ग्रिजली भालू था। भालू धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा और कुछ ही दूरी पर आकर रुक गया। खतरा भांपते हुए उसने साइकिल को अपने और भालू के बीच कर लिया। उसके हाथ में एक डंडा भी था, जिसे उसने बचाव के लिए आगे कर रखा था।

भालू ने डंडे को मुंह से पकड़कर दूर फेंक दिया। इसके बाद शख्स ने अपने पास मौजूद खाने का बैग भी भालू की तरफ फेंक दिया, ताकि उसका ध्यान दूसरी तरफ चला जाए। लेकिन भालू खाने की तरफ नहीं गया और अचानक उस पर झपट पड़ा।

भालू ने घसीटकर झाड़ियों में पहुंचा दिया

हमले के दौरान भालू ने उसे बुरी तरह दबोच लिया और घसीटते हुए झाड़ियों की तरफ ले गया। उसके शरीर पर लगातार पंजों और दांतों से वार होते रहे। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि उसे लगा अब शायद वह जिंदा नहीं बच पाएगा।

उसी दौरान उसे अपनी जेब में रखे छोटे पॉकेट नाइफ का ध्यान आया। किसी तरह उसने चाकू निकाला और भालू की गर्दन पर वार कर दिया। चोट लगने के बाद भालू ने उसे छोड़ दिया और जंगल की तरफ चला गया।

लेकिन तब तक वह बुरी तरह घायल हो चुका था और शरीर से लगातार खून बह रहा था।

अपनी शर्ट फाड़कर रोका खून

मदद के लिए उसके पास कोई प्राथमिक उपचार का सामान नहीं था। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन फाड़ी और घायल हिस्से पर बांधकर खून रोकने की कोशिश की।

इसके बाद उसने अपनी क्षतिग्रस्त साइकिल उठाई और एक पैर के सहारे किसी तरह वहां से निकलने लगा। घायल होने के बावजूद उसने करीब 45 मिनट तक साइकिल चलाकर मदद की तलाश जारी रखी।

आखिरकार उसे लकड़हारों का एक केबिन दिखाई दिया। वहां मौजूद लोगों ने उसकी हालत देखी तो तुरंत उसकी मदद शुरू की और एयर एंबुलेंस को सूचना दी।

शरीर पर मिले 60 से ज्यादा घाव

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने जब उसकी हालत देखी तो वे भी हैरान रह गए। उसके शरीर पर 60 से ज्यादा गहरे घाव थे। कुछ चोटें इतनी गंभीर थीं कि शरीर के अंदरूनी हिस्से तक दिखाई दे रहे थे।

डॉक्टरों ने कई घंटे तक ऑपरेशन किया और उसकी जान बचाई। इसके बाद उसे करीब 40 दिनों तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।

इतनी गंभीर चोटों के बावजूद उसने जिंदगी की जंग जीत ली। इस हादसे के बाद भी उसने जंगल और साइकिलिंग से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। हालांकि अब वह जंगल में पहले से कहीं ज्यादा सावधानी बरतता है।

यह घटना दिखाती है कि बेहद खतरनाक परिस्थिति में भी इंसान हिम्मत और सूझबूझ से काम ले तो बच निकलने की संभावना बनी रहती है। एक तरफ भालू का हमला, दूसरी तरफ शरीर पर दर्जनों गहरे घाव और फिर एक पैर से साइकिल चलाकर मदद तक पहुंचना—यह पूरा वाकया किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।

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