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दिल्ली में प्रदूषण से जंग तेज: IIT दिल्ली करेगा रियल-टाइम सोर्स स्टडी… DPCC सुपर-साइट होगी रीबूट

Satya Report: दिल्ली सरकार एयर पॉल्यूशन से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. IIT दिल्ली के नेतृत्व में एक एडवांस्ड, रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने की तैयारी है. बुधवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में IIT दिल्ली के वैज्ञानिकों की टीम ने यह विस्तृत प्रस्ताव रखा, जिसमें दिल्ली के एयर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने के लिए साइंस-बेस्ड रोडमैप दिया गया.

दिल्ली में प्रदूषण से जंग तेज: IIT दिल्ली करेगा रियल-टाइम सोर्स स्टडी… DPCC सुपर-साइट होगी रीबूट
दिल्ली में प्रदूषण से जंग तेज: IIT दिल्ली करेगा रियल-टाइम सोर्स स्टडी… DPCC सुपर-साइट होगी रीबूट

बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव पिछले सरकार के दौरान लंबे समय तक पेंडिंग रहा और बाद में फाइलों में बंद हो गया था. जबकि IITM पहले से PM2.5 पर काम कर रहा है, एक्शन प्लान के तहत PM10 पर भी फोकस करने का कमिटमेंट किया गया था. इसी दिशा में दिल्ली सरकार के एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी और IIT दिल्ली के बीच हुई बैठक में इस स्टडी को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार के अप्रूवल की प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि स्टडी जल्द से जल्द शुरू हो सके.

DPCC सुपर-साइट को फिर से होगी चालू

यह प्रस्तावित स्टडी 5 साल की अवधि की होगी और इसका उद्देश्य केवल पुराने डेटा पर आधारित विश्लेषण से आगे बढ़कर एयर पॉल्यूशन के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान करना है, खासकर PM10 के लिए. इससे पॉलिसी मेकर्स को पीक पॉल्यूशन के समय तुरंत निर्णय लेने और लंबे समय में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का आकलन करने में मदद मिलेगी. इस प्रोजेक्ट की एक प्रमुख विशेषता DPCC सुपर-साइट को फिर से चालू करना है, जिसे एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंट्स और मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स से जोड़ा जाएगा. इससे एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार होगा जो लगातार हाई-रिजोल्यूशन डेटा उपलब्ध कराएगा. .

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में एयर क्वालिटी सुधार दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है, और यह प्रस्तावित स्टडी इस दिशा में एक मजबूत साइंटिफिक सपोर्ट देगी. यह स्टडी सरकार को यह समझने में मदद करेगी कि पॉल्यूशन का सोर्स क्या है, कौन से फैक्टर्स इसे बढ़ा रहे हैं, और कौन से कदम ग्राउंड पर असर दिखा रहे हैं.

स्टडी की प्रमुख विशेषताएं

  • रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट: ऑनलाइन सैंपलिंग सिस्टम के जरिए पॉल्यूशन स्रोतों की लगातार पहचान, ताकि पीक पॉल्यूशन के समय तुरंत कार्रवाई हो सके.
  • हॉटस्पॉट मॉनिटरिंग: मोबाइल वैन के जरिए प्रमुख हॉटस्पॉट्स की मॉनिटरिंग, ताकि सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर किया जा सके.
  • 24×7 सुपर-साइट ऑपरेशन: लगातार डेटा कलेक्शन, जिससे बेसलाइन और सीज़नल ट्रेंड्स समझने में मदद मिले.
  • एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन: सीलोमीटर, GHG एनालाइज़र और मल्टी-चैनल सैंपलर्स का उपयोग, ताकि मौसम और लोकल एमिशन के असर को अलग किया जा सके.
  • लाइव डैशबोर्ड और रिपोर्टिंग: DPCC को लगातार डेटा फीड, साप्ताहिक अपडेट और मासिक रिपोर्ट्स.
  • एमिशन इन्वेंट्री अपडेट: दिल्ली के मौजूदा एमिशन डेटा को अपडेट करना.
  • अपविंड vs डाउनविंड एनालिसिस: सोनीपत साइट और दिल्ली सुपर-साइट के जरिए रीजनल पॉल्यूशन को समझना.
  • क्लाइमेट को-बेनिफिट्स: क्लीन एयर उपायों का क्लाइमेट पर असर का आकलन.

प्रोजेक्ट पांच साल में सभी प्रमुख हॉटस्पॉट्स को करेगा कवर

यह स्टडी डीपीसीसी स्टाफ के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग का भी हिस्सा होगी, जिसमें इंस्ट्रूमेंट ऑपरेशन, डेटा एनालिसिस, मॉडलिंग और केमिकल कैरेक्टराइजेशन पर ट्रेनिंग दी जाएगी. यह प्रोजेक्ट पांच साल में सभी प्रमुख हॉटस्पॉट्स को कवर करेगा, जहां हर हॉटस्पॉट पर कम से कम 30 दिनों का सीजनल सैंपलिंग किया जाएगा और सुपर-साइट पर लगातार मॉनिटरिंग होगी.

पॉल्यूशन स्रोतों की होगी सटीक पहचान

अधिकारियों के अनुसार, यह पहल दिल्ली को पॉल्यूशन स्रोतों की सटीक पहचान, पॉलिसी के असर का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति के लिए मजबूत डेटा बेस तैयार करने में मदद करेगी. मंत्री ने कहा कि दिल्ली की पॉल्यूशन के खिलाफ लड़ाई साइंस, डेटा और जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए, यह स्टडी हमें बताएगी कि पॉल्यूशन कहां से आ रहा है, और कौन से कदम वास्तव में असर डाल रहे हैं.

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