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फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

नेशविले (अमेरिका). दुनियाभर में कई ऐसी दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. कभी कोई बिना हाथ-पैर के पैदा हो जाता है, तो कभी किसी के दिल में ही जन्मजात दोष होते हैं. जब मां-बाप को इन खामियों के बारे में पता चलता है, तो उनके होश उड़ जाते हैं. उन्हें समझ नहीं आता है कि आखिर कैसे वो अपने नवजात को सामान्य जिंदगी दें. ऐसा ही एक दुर्लभ मामला अमेरिका के नेशविले शहर से सामने आया है. यहां पर एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ, जिसके सिर का आकार सामान्य से दोगुना या यूं कहें कि फुटबॉल जितना बड़ा था. बच्चे का नाम नोआ बेकर है. नोआ की मां मैडिसन जब 4 महीने की गर्भवती थी, तभी उसे अपने होने वाले बच्चे की इस दुर्लभ बीमारी के बारे में पता चल गया था. लेकिन पैदा होने के बाद नोआ का सिर लगातार बढ़ता रहा.

हालत ऐसी हो गई थी कि एक साल का मासूम नोआ न ठीक से बैठ पाता था, न अपना सिर संभाल पाता था और न ही सामान्य तरीके से खाना खा पाता था. उसकी जिंदगी बद से बदतर होती जा रही थी. आखिरकार डॉक्टरों ने एक बेहद जोखिम भरा फैसला लिया. उन्होंने नोआ के सिर की सर्जरी करने का फैसला किया. उन्होंने सर्जरी में नोआ की खोपड़ी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा हटाकर उसका आकार कम कर दिया. नोआ की मां मैडिसन बेकर बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान ही डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी दे दी थी कि उनके होने वाले बच्चे को हाइड्रोसिफलस है. यह ऐसी स्थिति होती है, जिसमें दिमाग के भीतर जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इसका दबाव बढ़ने पर शिशु का सिर तेजी से फैलने लगता है. इस तरह मार्च 2025 में जब नोआ का जन्म हुआ, तभी डॉक्टरों ने उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कर लिया.

महज दो सप्ताह की उम्र में नोआ की पहली सर्जरी हुई. डॉक्टरों ने दिमाग में जमा अतिरिक्त तरल निकालने के लिए शंट लगाया, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. अगले कुछ महीनों में उसे कई बार ऑपरेशन थिएटर जाना पड़ा. कुल मिलाकर छह ब्रेन सर्जरी करनी पड़ीं. समय के साथ नोआ का सिर इतना बड़ा हो गया कि उसकी परिधि करीब 26 इंच तक पहुंच गई. तुलना करें तो सामान्य नवजात के सिर की परिधि लगभग 13 से 14 इंच होती है. बढ़ते वजन की वजह से वह अपना सिर तक नहीं उठा पाता था. डॉक्टरों के मुताबिक अगर समय रहते इलाज नहीं किया जाता, तो आगे चलकर उसकी जान को भी खतरा हो सकता था. इसी वजह से 1 मई 2026 को डॉक्टरों की टीम ने क्रेनियल रिडक्शन सर्जरी की. यह बेहद जटिल प्रक्रिया थी, जिसमें खोपड़ी का बड़ा हिस्सा हटाकर उसका आकार कम किया गया, ताकि दिमाग पर पड़ने वाला दबाव नियंत्रित हो सके और बच्चे का शारीरिक विकास बेहतर हो.

डॉक्टरों द्वारा की गई सफल सर्जरी के बाद अब एक साल का मासूम नोआ सामान्य जिंदगी जीने की ओर बढ़ रहा है. वह अब पहले की तुलना में ज्यादा सहज महसूस कर रहा है और धीरे-धीरे रिकवरी कर रहा है. हालांकि, उसकी मां कहती हैं कि बेटे का बदला हुआ चेहरा देखकर उन्हें अभी भी थोड़ा अलग महसूस होता है. वह प्यार से उसके बड़े सिर को “बिग नोगिन” कहकर बुलाती थीं. मैडिसन ने आगे कहा कि उन्हें अपने बच्चे के बड़े सिर वाले रूप के साथ जीने की आदत हो गई थी, इसलिए बदलाव को स्वीकार करने में थोड़ा समय लग रहा है. लेकिन सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब मेरा बेटा सामान्य जिंदगी की ओर बढ़ रहा है. वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि हाइड्रोसिफलस का समय पर इलाज बेहद जरूरी है. सही इलाज मिलने पर कई बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं. नोआ का मामला भी इसी बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी समय पर चिकित्सा और लगातार देखभाल से उम्मीद कायम रह सकती है.

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