Satya Report: Jyeshtha Maah 2026 Niyam: 2 मई से ज्येष्ठ का महीना शुरू हो रहा है। हिंदू धर्म में यह माह अत्यंत ही पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्येष्ठ माह में पूजा पाठ, दानपुण्य और व्रत करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। यह माह सूर्य देव और हनुमान जी को समर्पित है। ज्येष्ठ में सूर्य देव और बजरंगबली की आराधना करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आपको बता दें कि ज्येष्ठ में आने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है, जिसे बुढ़वा मंगल भी कहते हैं। तो चलिए अब जानते हैं कि ज्येष्ठ महीने में किन नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि इस माह में क्या करें और क्या नहीं।

ज्येष्ठ माह में क्या करें
-
ज्येष्ठ महीने में भयंकर गर्मी पड़ती है। ऐसे में इस माह में जल दान सबसे अधिक पुण्यकारी माना गया है। जल का दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
-
ज्येष्ठ माह में पानी से भरा घड़ा , पंखा, जूता और चप्पल का दान अवश्य करें। ऐसा करने से आपके धनधान्य में बरकत होगी।
-
ज्येष्ठ महीने में पशुपक्षियों के लिए भी दाना पानी का इंतजाम करें। ऐसा करने देवीदेवता प्रसन्न होते हैं और उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है।
-
ज्येष्ठ माह में गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, धन, सत्तू और वस्त्र समेत भोजन का भी दान करें। ऐसा करने से आपको पुण्य लाभ मिलेंगे।
-
ज्येष्ठ महीने में सूर्य देव, हनुमान जी के साथ ही भगवान विष्णु और वरुण देव की भी उपासना करें।
-
ज्येष्ठ के महीने में सात्विक भोजन करें।
ज्येष्ठ माह में क्या न करें
-
ज्येष्ठ माह में मसालेदार चीजों का सेवन न करें।
-
ज्येष्ठ महीने में पानी की बर्बाद नहीं करना चाहिए। वरना वरुण देव आपसे नाराज हो सकते हैं।
-
जेष्ठ माह में घर के बड़े पुत्र या पुत्री का विवाह नहीं करना चाहिए।
-
ज्येष्ठ में दोपहर के समय सोने से भाग्य कमजोर होता है और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। बीमार लोगों पर यह नियम लागू नहीं होता है।



