
फ्लोरिडा, अमेरिका: जलवायु परिवर्तन का असर अब समुद्री जीवों की अगली पीढ़ी पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका के फ्लोरिडा में समुद्री कछुओं पर किए जा रहे एक लंबे शोध में चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिन कछुओं के बच्चों का अध्ययन किया जा रहा है, उनमें लगभग सभी मादा हैं। लगातार कई वर्षों से नर कछुओं की संख्या बेहद कम मिलने के कारण शोधकर्ता चिंतित हैं।
फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी की समुद्री विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिक स्थानीय समुद्री कछुओं के अंडों से निकले बच्चों का अध्ययन कर रहे हैं। इसमें लॉगरहेड, लेदरबैक और ग्रीन सी टर्टल प्रजातियां शामिल हैं। शोध के दौरान सामने आया कि प्रयोगशाला में फिलहाल जिन बच्चों को पाला और अध्ययन किया जा रहा है, वे सभी मादा हैं।
तापमान तय करता है कछुए का लिंग
समुद्री कछुओं में इंसानों की तरह लिंग तय करने वाले सेक्स क्रोमोसोम नहीं होते। इनके अंडों के भीतर भ्रूण का विकास जिस तापमान पर होता है, उसी के आधार पर नर या मादा का विकास होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, अपेक्षाकृत ठंडे तापमान में नर कछुओं के विकसित होने की संभावना अधिक होती है, जबकि गर्म तापमान मादा कछुओं के जन्म को बढ़ावा देता है। फ्लोरिडा के समुद्र तटों पर बढ़ती गर्मी के कारण अंडों के घोंसलों का तापमान भी बढ़ रहा है। इससे कई जगहों पर मादा कछुओं की संख्या अधिक हो रही है।
कई वर्षों से नर कछुओं की संख्या बेहद कम
इस शोध का नेतृत्व कर रहीं प्रोफेसर जेनेट वायनेकेन पिछले 24 वर्षों से समुद्री कछुओं के घोंसलों के तापमान पर नजर रख रही हैं। इसके लिए घोंसलों में विशेष उपकरण लगाए जाते हैं, जो अंडों के विकास के दौरान तापमान का रिकॉर्ड रखते हैं।
उनके अध्ययन में कई ऐसे साल सामने आए हैं, जब जांच किए गए कछुओं में कोई नर नहीं मिला या उनकी संख्या महज एक से दो प्रतिशत रही। वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्री कछुओं की आबादी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए हर तीन से चार साल में लगभग 25 प्रतिशत नर होना जरूरी माना जाता है। लेकिन अध्ययन वाले क्षेत्रों में यह अनुपात लगातार कम दिखाई दे रहा है।
आज की गर्मी का असर दशकों बाद दिख सकता है
समुद्री कछुओं को प्रजनन योग्य होने में लगभग 20 से 30 साल लगते हैं। इसका मतलब है कि आज पैदा हो रहे कछुओं में नर और मादा का असंतुलन भविष्य में प्रजनन करने वाली आबादी को प्रभावित कर सकता है।
वैज्ञानिकों की चिंता है कि इस समस्या के गंभीर परिणाम अगले 10 से 20 वर्षों में दिखाई दे सकते हैं। तब तक मौजूदा पीढ़ी के कई कछुए वयस्क हो चुके होंगे और प्रजनन के लिए समुद्र तटों पर लौटेंगे।
गर्मी से अंडों और बच्चों के विकास पर भी असर
शोधकर्ताओं के मुताबिक, बहुत अधिक तापमान केवल कछुओं के लिंग अनुपात को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि भ्रूण के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकता है। अत्यधिक गर्मी से अंडों में पल रहे भ्रूण की मृत्यु हो सकती है या बच्चों के अंगों के विकास में गड़बड़ी आ सकती है। उनके शरीर में मौजूद योक सैक यानी पोषण देने वाली थैली भी प्रभावित हो सकती है।
इस साल फ्लोरिडा में कछुओं के अंडों से बच्चे निकलने की अनुमानित सफलता दर करीब 53 प्रतिशत रही, जबकि सामान्य तौर पर यह 65 से 75 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार लगातार गर्म तापमान भी एक बड़ी चुनौती रहा।
नर कछुओं की संख्या बढ़ाने के लिए क्या हो सकता है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, घोंसलों को छाया देना या रेत को ठंडा रखने जैसे उपायों से तापमान कम किया जा सकता है। इससे नर कछुओं के विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, इन तरीकों की अपनी सीमाएं हैं और इन्हें बड़े स्तर पर लागू करना आसान नहीं है।
फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी की टीम प्रयोगशाला में कछुओं के बच्चों को तब तक पालती है, जब तक उनकी जांच करके लिंग की पहचान करना संभव न हो जाए। हाल ही में ऐसे 40 कछुओं को बड़ा होने के बाद वापस समुद्र में छोड़ दिया गया। शोधकर्ताओं के पास इन कछुओं के जन्मस्थान और उनके अंडों के तापमान का रिकॉर्ड भी मौजूद है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्री कछुओं के बच्चों में लिंग की पुष्टि करना विशेषज्ञता और विशेष सुविधाओं वाला काम है। इसलिए दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से अधिक आंकड़े जुटाने की जरूरत है।
1000 में से केवल एक कछुआ पहुंच पाता है वयस्क अवस्था तक
शोधकर्ताओं के अनुसार, समुद्री कछुओं के बच्चों का जीवन सफर बेहद कठिन होता है। अनुमान है कि जन्म लेने वाले हर 1000 बच्चों में से केवल एक ही वयस्क अवस्था तक पहुंच पाता है।
हाल ही में समुद्र में छोड़े गए 40 कछुए भी इसी चुनौतीपूर्ण सफर पर निकल चुके हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे सुरक्षित बड़े होंगे। लेकिन शोधकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि भविष्य में समुद्री कछुओं की आबादी को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त संख्या में नर और मादा दोनों मौजूद रहें।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के शोध और उपलब्ध वैज्ञानिक रिपोर्ट पर आधारित है। समुद्री कछुओं की विभिन्न प्रजातियों और क्षेत्रों में लिंग अनुपात को समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।



