
स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन के सामने लंबे समय तक रहने से आंखों पर दबाव पड़ सकता है। इसके कारण आंखों में थकान, सूखापन, जलन और कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। बच्चों और युवाओं में मायोपिया यानी दूर की चीजें साफ न दिखने की समस्या भी बढ़ रही है। हालांकि, नजर कमजोर होने या चश्मे का नंबर बार-बार बदलने के पीछे सिर्फ स्क्रीन का इस्तेमाल ही जिम्मेदार नहीं होता।
मायोपिया के अलावा मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी और उम्र से जुड़ी समस्याएं भी आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में कई लोग आंखों को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपाय तलाशते हैं। आयुर्वेद में संतुलित खानपान के साथ कुछ औषधीय जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाता है। शहद और अश्वगंधा ऐसी ही दो चीजें हैं, जिनके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर शोध किया गया है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी खाद्य पदार्थ या जड़ी-बूटी के एंटीऑक्सीडेंट गुण होने का मतलब यह नहीं है कि वह चश्मे का नंबर कम कर सकती है या कमजोर नजर को ठीक कर सकती है। आइए जानते हैं कि शहद और अश्वगंधा में कौन से गुण पाए जाते हैं और आंखों की सेहत के लिहाज से इनकी क्या भूमिका हो सकती है।
शहद आंखों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है?
शहद में फ्लेवोनॉयड और फेनोलिक एसिड जैसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाली कोशिकीय क्षति और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा शहद में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। कुछ शोध में इसके यौगिकों के सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर संभावित प्रभाव का अध्ययन किया गया है। ये गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिहाज से उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन शहद खाने से आंखों की कमजोर रोशनी ठीक होने या चश्मे का नंबर घटने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
अश्वगंधा आंखों की सेहत के लिए कैसे उपयोगी हो सकती है?
अश्वगंधा का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें विथेनोलाइड्स नामक जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। अश्वगंधा के एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों पर भी शोध हुआ है।
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में अश्वगंधा के संभावित एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों को लेकर अध्ययन किए गए हैं। हालांकि, आंखों की रोशनी बढ़ाने, मायोपिया ठीक करने या चश्मे का नंबर कम करने में अश्वगंधा की प्रभावशीलता अभी प्रमाणित नहीं है। इसका सेवन भी बिना विशेषज्ञ की सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ लोगों में इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं और यह कुछ दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है।
आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए क्या करें?
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए केवल किसी एक हर्ब या घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना सही नहीं है। रोजमर्रा की कुछ आदतें आंखों की देखभाल में मदद कर सकती हैं।
- स्क्रीन से ब्रेक लें: लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर 20-20-20 नियम अपनाएं। हर 20 मिनट में लगभग 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।
- संतुलित आहार लें: हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, अंडे, फल और ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
- पर्याप्त नींद लें: नींद की कमी से आंखों में थकान और सूखापन महसूस हो सकता है।
- नियमित जांच कराएं: चश्मे का नंबर बार-बार बदल रहा है या नजर धुंधली हो रही है तो आंखों के डॉक्टर से जांच कराएं।
- बिना सलाह आंखों में कुछ न डालें: शहद, तेल या किसी भी घरेलू पदार्थ को सीधे आंखों में डालना नुकसानदायक हो सकता है।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर चश्मे का नंबर तेजी से बदल रहा है, लगातार धुंधला दिखाई दे रहा है, आंखों में दर्द या लालिमा है, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। अचानक नजर कम होना, आंखों के सामने पर्दा आने जैसा महसूस होना या तेज दर्द होना आपात स्थिति हो सकती है। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष: शहद और अश्वगंधा में कुछ ऐसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं जिनके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर शोध हुआ है। लेकिन इन्हें कमजोर नजर, मायोपिया या बढ़ते चश्मे के नंबर का इलाज नहीं माना जा सकता। आंखों की अच्छी सेहत के लिए संतुलित खानपान, स्क्रीन का सीमित इस्तेमाल और समय-समय पर आंखों की जांच सबसे जरूरी हैं।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शहद और अश्वगंधा को आंखों की रोशनी बढ़ाने या चश्मे का नंबर कम करने का प्रमाणित उपचार न समझें। किसी भी हर्बल सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।



